घटना के एक महीने बाद बुधवार रात सनी की मौत हो गई। परिवार के लोग शव लेकर घर पहुंचे। उसके घर पहुंची पुलिस शव को कब्जे में लेने की बात करने लगी तो परिवार व गांव के लोगों की पुलिस से नोकझोंक शुरू हो गई। ग्रामीणों ने सुबह करीब 10 बजे शव लेकर राम जानकी मार्ग पर पहुंच गए। शव को चारपाई पर रखकर पन्नी तानकर, बेंच व बल्ली लगाकर मार्ग को अवरुद्ध कर दिया। नारेबाजी होते देख पुलिस के हाथ पांव फूलने लगे।
कप्तानगंज, कलवारी, नगर थाने की फोर्स लेकर कलवारी के सीओ विनय चौहान मौके पर पहुंचे। सीओ और नायब तहसीलदार ने लोगों को समझाने की भरसक कोशिश की, लेकिन बात नहीं बनी। परिवार के लोग मौके पर एसपी व डीएम को बुलाने की मांग करने लगे। करीब एक बजे हर्रैया की एसडीएम अमृतपाल कौर ने लोगों को समझाने की कोशिश की। दोपहर 1:40 बजे पुलिस ने लाठियां भांजते हुए भीड़ को दौड़ा लिया। शव पोस्टमार्टम ले जाते वक्त छीना झपटी में एक महिला सिपाही के अंगुली में चोट आई।
कलवारी से परिवर्तित करना पड़ा मार्ग
सुबह 10 बजे से दुबौलिया में जाम लगने की वजह से राम जानकी मार्ग पर आवाजाही ठप हो गई थी। वाहनों का काफिला लंबा लगाने के बाद पुलिस को कलवारी से दुबौलिया की तरफ जाने वाले वाहनों को वाया फुटहिया डायवर्ट करना पड़ा।
पुलिस गंभीर होती तो नहीं बढ़ती बात
मारपीट में सनी के गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद पुलिस ने एनसीआर दर्ज किया। इससे उसके परिवार वालों में असंतोष था। उन लोगों का आरोप है कि पुलिस एनसीआर दर्ज कर मामले को निपटा देना चाहती थी। परिवार के लोग बार-बार आरोपियों की गिरफ्तारी व धारा बढ़ाने की मांग करते रहे थे, लेकिन पुलिस नजरअंदाज करती रही।
चंदा लेकर कराना पड़ा इलाज
बताया जाता है कि सनी के परिवार वालों की माली हालत काफी खराब है। उसके इलाज के लिए परिवार वालों को चंदा मांगना पड़ा। लोगों के अनुसार अगल-बगल के गांव से भी चंदे के रूप में रुपये लेकर उसकी दवा हुई।