बस्ती(ब्यूरो)। भाकियू राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दीवान चंद चौधरी ने वेतन आयोग की संस्तुतियों की तरह केंद्र सरकार को किसान आयोग की संस्तुतियों को लागू करने की मांग की है। उन्होंने सरकार को अल्टीमेटम दिया कि केंद्र और राज्य सरकारों ने किसान समस्याओं का समाधान नहीं किया तो सितंबर में राष्ट्र व्यापी आंदोलन छेड़ा जाएगा। आंदोलन की शुरुआत उत्तर प्रदेश से होगी।
बृहस्पतिवार को जारी विज्ञप्ति में भाकियू नेता ने कहा कि केंद्र सरकार भी किसानों के साथ धोखा कर रही है। प्रधानमंत्री किसानों की आमदनी दो गुना करने का स्वप्न दिखाते हैं किंतु, जब नीतियों के स्तर पर निर्णय लेने की बात आती है तो किसान के साथ छल होता है। जब तक किसानों को उत्पादन लागत से अधिक मूल्य नहीं मिलेगा उसका संकट बना रहेगा। केंद्र सरकार ने धान और गेहूं के समर्थन मूल्य में मात्र साढे़ तीन प्रतिशत बढ़ोतरी की है, महंगाई और लागत मूल्य लगातार बढ़ रहे हैं। कहा कि भाजपा के घोषणा पत्र में कहा गया था कि किसानों को फसलों के उत्पादन लागत मूल्य में 50 प्रतिशत लाभ जोड़कर दिया जाएगा किंतु सच्चाई इसके ठीक विपरीत है। किसानों को प्याज नि:शुल्क दे देना पड़ा और सरकार तमाशबीन बनी रही।
भाकियू राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दीवान चंद चौधरी ने कहा कि राज्य सरकारों से बोनस देने का अधिकार छीनकर केंद्र सरकार ने किसान विरोधी निर्णय लिया है। कहा कि प्रदेश की समाजवादी पार्टी सरकार शत-प्रतिशत गन्ना मूल्य भुगतान का दावा कर रही है यह बड़ा झूठ है। प्रदेश में चीनी मिलों पर दो हजार करोड़ से अधिक का गन्ना मूल्य भुगतान शेष है और किसान परेशान है। गन्ना मूल्य न बढ़ाए जाने के कारण किसानों का मोह भंग हो रहा है। सरकार ने चीनी मिल मालिकान को 18 हजार करोड़ रुपये राहत के नाम पर दे दिया किंतु गन्ने का मूल्य पिछले तीन साल से नहीं बढ़ाया गया। ऐसी स्थिति में किसानों की हालत कैसे सुधरेेंगे।