बस्ती/विक्रमजोत। भीषण गर्मी में सरकारी हैंडपंप शोपीस बन गए हैं। हालांकि स्कूल बंद होने से शहर में समस्या कम है, लेकिन बिजली व्यवस्था लड़खड़ाने से पानी के लिए लोग हैंडपंप पर ही लाइन लगाते हैं।
पालिका क्षेत्र में लगभग दो सौ हैंडपंप स्थापित हैं। इनमें कई हैंडपंपों का पानी मटमैला आता है। नगरीय क्षेत्र में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था पालिका की जिम्मेदारी है। इस बाबत नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी केके चौबे ने कहा कि पालिका क्षेत्र में लगभग दो सौ हैंडपंप स्थापित हैं। सर्वे कराया जा रहा है। जहां भी हैंडपंपों खराब होंगे, उसे दुरुस्त कराया जाएगा। यदि रिबोर की जरूरत आती है तो जल निगम को इसकी सूचना दे दी जाएगी।
वहीं डेढ़ लाख की आबादी वाले विक्रमजोत ब्लॉक के 321 राजस्व गांवों में 3025 इंडिया मार्का हैंडपंप स्थापित किए गए हैं। इनमें पचास फीसदी खराब हैं। गांवों में लोगों को पीने लायक पानी नहीं मिल रहा है। लोग मजबूरन देशी हैंडपंपों से अपनी प्यास बुझा रहे हैं। इसके चलते जलजनित बीमारियां के फैलने की आशंका बढ़ गई है। दूषित जल पीने से पेचिस, नेत्र रोग, गलाघोटू, टाइफाइड, त्वचा रोग, हाथी पांव जैसी बीमारियां भी होती हैं। स्थानीय निवासी बलराम सिंह, महेंद्र दूबे, देवेंद्र सिंह, सीताराम चौहान, महेंद्र, संतू सिंह, राजेंद्र यादव, शिवम शुक्ला कहते हैं कि सालों से खराब पड़े व दूषित जल पिला रहे हैंडपंपों की मरम्मत शिकायत के बाद भी नहीं कराई जा रही है। गर्मी के इस मौसम में तमाम जलजनित बीमारियां फैलने की आशंका बढ़ गई है।
पूर्व जिला पंचायत सदस्य दिनेश सिंह ने हैंडपपों के रिबोर को लेकर कर्मचारियों पर आरोप लगाया कि इंडिया मार्क नल के रिबोर के नाम पर बडे पैमाने पर धांधली का जा रही है। आरोप लगाया कि रिबोर के नाम पर 15 से 20 हजार खारिज कर दिया जा रहा है, मगर समस्या दूर नहीं हो पा रही है। हैंडपंपों के रखरखाव व पेयजल समन्वयक अमित सिंह ने बताया कि ब्लाक क्षेत्र मे अभी तक 137 इंडिया मार्क नलों को रिबोर किया जा चुका है जबकि लगभग दो सौ रिबोर की मांग ग्राम पंचायतों ने की है। शीघ्र ही व्यवस्था बना दी जाएगी। बीडीओ इंद्रपाल सिंह यादव का कहना है कि इण्डिया मार्का नलों की मरम्मत व रिबोर कराने की जिम्मेदारी ग्राम सभा की है जिसके लिये सरकार उन्हें धन उपलब्ध करा रही है अगर नलों को सही नहीं कराया जा रहा है तो जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जायेगी ।