जिले के ढाई हजार ऑटो-रिक्शे इन दिनों पूरी तरह से मानक विहीन हो चुके हैं। इनमें अधिकांश का फिटनेस नहीं बन पाया है तो बहुत से ऑटो के बीमा ही समाप्त हो चुके हैं। यह तो गनीमत है कि परिवहन विभाग अभी तक जांच अभियान में फिसड्डी साबित हो रहा है। नहीं तो आधे से अधिक ऑटो सीज हो जाते और उन पर उनकी कीमत से अधिक का जुर्माना लद जाता।
खटारा ऑटो से ढोए जा रहे यात्री
एआरटीओ पंकज कुमार सिंह के अनुसार जिले में कुल 3713 ऑटो-रिक्शा पंजीकृत हैं। इनमें 2487 ऑटो के फिटनेस के लिए नोटिस जारी की गई है। अब तक सिर्फ डेढ़ सौ ऑटो का ही सबकुछ दुरुस्त हो सका है। बाकी अभी मानक विहीन होकर यात्रियों के लिए जानलेवा बने हुए हैं। इनमें अधिकांश का न तो बीमा हो पाया है और न ही ऑटो संचालक उनका प्रदूषण प्रमाणपत्र ही बनवा पाए हैं। एआरटीओ ने बताया कि 63 ऑटो को पकड़ कर विभिन्न थानों में सीज किया गया है। इन पर तकरीबन 25 से 30 हजार का जुर्माना लगाया गया है।
इस तरह लगता है जुर्माना कि हो जाएं कबाड़
एआरटीओ पंकज कुमार सिंह के अनुसार बिना परमिट ऑटो का पांच हजार, टैक्स बकाया होने पर नौ हजार, बगैर फिटनेस पर पहली बार पांच हजार, उसके बाद हर बार 10 हजार, प्रदूषण प्रमाणपत्र न होने पर 10 हजार रुपये जुर्माना लगाने का प्राविधान है। इससे अवैध ऑटो स्वामियों को कीमत से अधिक जुर्माना देना पड़ सकता है।