चित्रांश क्लब ने अमर शहीद राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ की जयंती मनाई।
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बस्ती। स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन के अमर बलिदानी राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ को उनकी जयंती पर चित्रांश क्लब की ओर से शनिवार को गांधी कला भवन में कार्यक्रम आयोजित कर नमन किया गया। क्लब के अध्यक्ष अजय कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि जब भी भारत के स्वाधीनता इतिहास में महान क्रांतिकारियों की बात होगी, भारत मां के इस वीर सपूत का जिक्र होगा।
राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ महान क्रांतिकारी ही नहीं, बल्कि उच्च कोटि के कवि, शायर, अनुवादक, बहुभाषाविद् और अप्रतिम साहित्यकार भी थे। उन्होंने अपनी बहादुरी और सूझबूझ से अंग्रेजी हुकूमत की नींद उड़ा दी। उनकी प्रसिद्ध रचना ‘सरफरोशी की तमन्ना..’ गाते हुए न जाने कितने क्रांतिकारी देश की आजादी के लिए फांसी के फंदे से झूल गए। राम प्रसाद बिस्मिल ने ‘मैनपुरी कांड’ और ‘काकोरी कांड’ को अंजाम देकर अंग्रेजी साम्राज्य की नींव हिला दी थी। लगभग 11 वर्ष के क्रांतिकारी जीवन में उन्होंने कई पुस्तकें लिखीं और स्वयं ही उन्हें प्रकाशित किया।
क्लब के प्रदेश प्रवक्ता अशोक श्रीवास्तव ने कहा कि राम प्रसाद बिस्मिल का जन्म 11 जून 1897 को उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले में हुआ था। उनके पिता का नाम मुरलीधर और माता का नाम मूलमती था। बचपन से ही देश को आजाद कराना उनके ध्येय में शामिल हो गया है। उनका योगदान सदैव याद किया जाएगा।
भानु प्रताप सिंह ने ‘बिस्मिल’ के योगदान की चर्चा करते हुए कहा कि पार्टी के कार्य के लिए धन की आवश्यकता पूर्ण करने के लिए बिस्मिल ने सरकारी खजाना लूटने की योजना बनाई और उनके नेतृत्व में कुल 10 लोगों, जिनमें अशफाक उल्ला खां, राजेंद्र लाहिड़ी, चंद्रशेखर आजाद आदि शामिल थे, ने लखनऊ के पास काकोरी स्टेशन पर ट्रेन रोककर 9 अगस्त 1925 को सरकारी खजाना लूट लिया। परमेश्वर शुक्ल ‘पप्पू’ ने कहा कि जिस समय रामप्रसाद बिस्मिल को फांसी दी गई, उस समय जेल के बाहर हजारों लोग उनके अंतिम दर्शनों की प्रतीक्षा कर रहे थे। इस मौके पर सर्वेश श्रीवास्तव, शरद सिंह रावत, मनमोहन श्रीवास्तव ‘काजू’ रामानंद ‘नन्हें’ सूरज गुप्ता, अखंड पाल आदि मौजूद रहे।