बस्ती। वृहद पौधरोपण अभियान के तहत जिले में अभी तक 33 लाख 50 हजार 705 पौधों की रोपाई की गई, जिसमें कुछ बचे तो बाकी लापता हो गए हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोग कितना गंभीर हैं।
शासन ने जिले के लिए इस बार दो चरणों में 37 लाख 83 हजार 120 पौधों को रोपने का लक्ष्य निर्धारित किया है। वहीं जिले की पौधरोपण समिति तकरीबन दो लाख पौधे अधिक यानी कि 39 लाख 74 हजार 755 पौधे रोपने का लक्ष्य मानकर चल रही है। यहां पौधरोपण अभियान दो चरणों 22 जुलाई व 15 अगस्त को पूरा किया जाना था। पहले चरण में 22 जुलाई को 33 लाख 47 हजार 238 पौधों का रोपण किया गया और बाकी 6 लाख 27 हजार 517 पौधों का रोपण 15 अगस्त को किया जाना निर्धारित किया गया है।
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इन विभागों को इतना करना था पौधरोपण
हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी वन व पर्यावरण समेत 27 विभागों को पौधरोपण की जिम्मेदारी सौंपी गई है। डीएफओ नवीन कुमार शाक्य के अनुसार दोनों चरणों में संपूर्ण लक्ष्य को पूरा कर लिया जाएगा।
- वन एवं वन्य जीव विभाग - 1401475
- पर्यावरण विभाग - 141000
- ग्राम्य विकास विभाग - 155000
- राजस्व विभाग - 125000
- पंचायती राज विभाग - 152000
- रक्षा विभाग - 3000
- रेलवे - 10000
- आवास विकास - 3000
- उद्योग - 6000
- औद्योगिक विकास - 6000
- नगर विकास - 17000
- लोक निर्माण - 8000
- जलशक्ति - 9000
- रेशम - 22000
- कृषि - 293000
- पशुपालन - 6000
- सहकारिता - 6720
- उर्जा - 4340
- माध्यमिक शिक्षा - 9000
- बेसिक शिक्षा - 15000
- उच्च शिक्षा - 14000
- प्राविधिक शिक्षा - 4000
- श्रम विभाग - 1200
- स्वास्थ्य विभाग - 8000
- परिवहन विभाग - 1100
- उद्यान - 185000
- गृह विभाग - 4060
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नगरीय क्षेत्र में बरगद, पीपल, बेल, नीम, आम आदि के 1400 पौध रोपित किए गए थे। इनमें छिटपुट को छोड़ अधिकांश सुरक्षित हैं। इसका कारण इस बार सड़क किनारे लगवाने के बजाय नगर पालिका के सदस्यों व अध्यक्ष ने अपने बाउंड्री वाल से घिरी जमीन में लगाया है। नगर पालिका अध्यक्ष नेहा वर्मा ने कहा कि हरियाली के लिए पौध सुरक्षा की जरूरत होती है। केवल पौधरोपण से अभियान सफल नहीं होगा। ऐसे में पौध वृक्ष बन सकें। इसकी व्यवस्था इस बार हुई है।
पौध सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं
जिले के पचवस झील पर सूबे के युवा कल्याण मंत्री गिरीश चंद्र यादव ने पौधरोपण कर हरा भरा बनाने का प्रयास किया था। यहां करीब एक हजार पौधे रोपित किए गए हैं। इनमें से अधिकांश तो समाप्त हो चुके हैं, जबकि कुछ पौधे बचे हैं जो असुरक्षित हैं। हालांकि वन विभाग के अधिकारी बताते हैं कि ग्राम सभाओं में लगाए गए पौधों की सुरक्षा की जिम्मेदारी प्रधान सचिव सहित अन्य अधिकारियों की है।
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तपसी धाम व अमोलीपुर में भी सुरक्षित हैं पौधे
धार्मिक स्थल तपसी धाम व हर्रैया के अमोलीपुर में तकरीबन 2000 पौध रोपित किए गए थे। इनका रोपण युवा कल्याण मंत्री गिरीश चंद्र यादव व अपर मुख्य सचिव मोनिका एस. गर्ग, डीएम प्रियंका निरंजन व अन्य अधिकारियों ने किया था। इसमें से पौधे सुरक्षित हैं, मगर कुछ पौधे ट्री गार्ड न हाेने के कारण खराब हो गए। हालांकि अधिकांश सुरक्षित हैं, यहां बाड़ लगाकर पौधों को घेरा गया है। कुछ पौध सूखने भी लगे हैं। अधिकारियों व मंत्री के पौधों की सुरक्षा ट्री गार्ड कर रहे हैं।
दूसरों के भरोसे छोड़ दी पौध
वैसे तो पौधरोपण अभियान में मुख्य भूमिका वन विभाग की होती है। मगर अपने जिले में प्रशासन के भरोसे वन विभाग ने व्यवस्था छोड़ दी। इसके अलावा पौधों की सुरक्षा को भी लेकर सवाल उठने लगे हैं। क्योंकि विभाग ने कहीं भी कोई सुरक्षा की व्यवस्था नहीं की है। ऐसे में ग्राम प्रधान, सचिव व ग्रामीणों की जिम्मेदारी है।
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हर तरह के पौधों की हो रही रोपाई
पौधरोपण अभियान में छायादार व फलदार के अलावा इमारती और औषधीय पौधों की रोपाई की जा रही है। इनमें पीपल, पाकड़, जामुन, गूलर, अर्जुन, शीसम, सागौन, कटहल, आम, अमरूद व गुलमोहर आदि के पौधे शामिल हैं। बताया कि इन पौधों के संरक्षण की जिम्मेदारी रेंजवार रेंजरों को सौंपी गई है। ग्राम पंचायत व अन्य को भी पौध सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई है। इसमें कोई बजट नहीं मिलता है। मनरेगा से ग्राम पंचायत इसे रोपित करेंगे।
-नवीन कुमार शाक्य, डीएफओ