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Basti News: अखरने लगता है शहर में तीन किमी का सफर

Tue, 24 Sep 2024 04:02 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
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कचहरी से गांधीनगर होकर रोडवेज पहुंचना राहगीरों के लिए कठिन
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हनुमानगढ़ी, पक्के पुलिस बूथ, एसबीआई के पास रेंगते रहते हैं वाहन
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। शहर में तीन किमी का सफर हर किसी को अखरने लगता है। कदम-कदम पर बाधा है। न दुकानदार हद में है और न ही ठेला-गिमटी की कोई जद है। चार पहिया वाहन से चलने वाले लोग भी अलग जिद में हैं। सड़क पर ही गाड़ी खड़ी कर काम निपटाने लगते हैं। आम राहगीर किधर से निकले, कहां जाएं इसकी चिंता किसी को नहीं है। यह झंझावत रोजाना उत्पन्न होती है। यही वजह है कि कचहरी से गांधीनगर होकर रोडवेज तक का सफर हर किसी को अखरने लगता है।
शहर में बेतरतीब व्यवस्था में यातायात संचालित हो रही है। कहीं आवागमन ठप है तो कहीं रेंगते हुए वाहन नजर आते हैं। स्कूटी, बाइक, ऑटो, कार पर चलने वाले व राहगीर जाम से परेशान हैं। स्कूल, दफ्तर, स्टेशन, अस्पताल चाहे जहां पहुंचने की जल्दी हो, यदि समय की बचत लेकर नहीं चलेंगे तो इस शहर में झेल जाएंगे। इस समस्या से निजात दिलाने में कोई बड़ी चुनौती भी नहीं है। बस आमजन में यातायात नियमों के प्रति थोड़ी समझदारी हो तो बात बन जाएगी।
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व्यवसायी हो या राहगीर सड़क पर अवरोध न बनें। दूसरा प्रशासनिक सख्ती सिर्फ इतना हो कि हर जगह सड़क खाली दिखे। न तो सड़क के किनारे पार्किंग हो न ही सड़क के दायरे में दुकान सजे। शायद इतनी व्यवस्था बन जाने से ही आवागमन एकदम आसान हो जाएगा। शहर के किसी भी सड़क पर हर कोई मनमुताबिक रफ्तार में चलकर बिना समय गंवाए अपना काम निपटा सकता है। मगर, इतना होने में ही कठिनाई है।
यही वजह है कि शहर की सड़कों पर वाहन से निकलने के बाद उलझन बढ़ जाती है। गर्मी के सीजन में एक हाथ में वाहन की हैंडिल और दूसरे हाथ से माथे का पसीना पोछना पड़ता है। गांधीनगर, कंपनीबाग, रोडवेज, अस्पताल चौराहा, दक्षिण दरवाजा, रौता चौराहा पर आवागमन अक्सर बाधित हो रहा है।
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राहगीर भी मान रहे हैं खाली होनी चाहिए सड़क
राहगीर भी यह मान रहे हैं कि यदि सड़क खाली हो जाए तो जाम की समस्या लगभग खत्म हो जाएगी। अक्सर कोई न कोई अवरोध होने के कारण जगह-जगह शहरी आवागमन प्रभावित होता है। इस पर कोई प्रभावी अंकुश नहीं है। जामडीह के रहने वाले प्रिंस शुक्ल बताते हैं कि सड़क की हद में यदि कोई अवरोध न हो तो शहर में सरपट यात्रा की जा सकती है। लेकिन, यहां तो कहीं सड़क के दायरे में दुकान लगी है तो कहीं उसके आगे दो और चार पहिया वाहन खड़ा रहता है। पिकौरा शिवगुलाम के सुधीर कुमार ने बताया कि अभी यहां यातायात नियमों के प्रति सजगता नहीं है। जिसका जहां मन कर रहा है वहीं वाहन खड़ा कर दे रहा है। कुछ लोग सड़क और फुटपाथ पर बेरोकटोक दुकान लगा रहे हैं। बरदहिया बाजार की रहने वाली प्रियंका ने शहर की खराब यातायात व्यवस्था का दर्द बयां किया। कहा कि सुबह स्कूटी से वह कचहरी गई थी। लौटते समय यात्रा में तमाम चुनौतियों का सामना करना पड़ा। कंपनीबाग के पास एक स्कार्पियों सवार लोग सड़क पर गाड़ी खड़ी कर किनारे स्थित एक दुकान पर जूस पीने चले गए। उसके पीछे सफारी गाड़ी आकर रुक गई। धीरे-धीरे जाम लग गया।
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बड़े वाहन के पहुंचने पर बढ़ जाती है समस्या
गांधीनगर की सड़क दस मीटर चौड़ी है। मगर, यहां जैसे ही स्कूल बस, एंबुलेंस, डाक विभाग एवं बैंक सिक्योरिटी की बड़ी गाड़ी पहुंचती है छोटे वाहनों का निकलना मुश्किल हो जाता है। अतिक्रमण के चलते सड़क के बचे हुए हिस्से में यह वाहन धीमी गति में आगे बढ़ते हैं। उसके पीछे दो पहिया, कार, ऑटो जैसे छोटे वाहनों की कतार लगी रहती है। उन्हें अगल- बगल से ओवरटेक करने की कोई गुंजाइश नहीं रहती है।
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कोट
यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए नए सिरे से योजना तैयार की जा रही है। सड़क को खाली रखना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। यदि मनमाने ढंग से सड़क पर कोई गाड़ी खड़ी करेगा, ठेला आदि लगाएगा तो कार्रवाई होगी।
-सत्येंद्र भूषण त्रिपाठी, सीओ यातायात
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