- ग्रामीण अंचल के रूटों पर नहीं मिल रहे यात्री ढोने वाले वाहन
- निजी और सरकारी बस सेवा करा रही लंबी दूरी की यात्रा, परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। जिले के लोकल रूट पर यात्रा मुश्किल हो गई है। ग्रामीण अंचल के रूटों पर लोकल यात्रा कराने के लिए सरकारी एवं निजी दोनों बस सेवाओं ने तौबा कर लिया है। छोटे टैक्सी वाहनों में शुमार जीप का चलन लगभग खत्म हो चुका है। लोकल रूट पर चलने के लिए अब ऑटो, मैजिक ही केवल सहारा है। जिससे किराया मनमाना वसूला जा रहा है।
यात्रियों को ढोने वाले बड़े वाहनों में शामिल एसी, नान एसी बस ज्यादातर गोरखपुर- लखनऊ फोरलेन पर ही दौड़ रही है। सवारी ढोने की परमिट इस रूट पर भी नहीं है। लेकिन, विभागीय मिली भगत से ऑल यूपी एवं ऑल इंडिया परमिट बनवाकर बस्ती मंडल के विभिन्न प्रमुख कस्बों से लखनऊ तक के यात्री ढोए जा रहे हैं। ऐसे में लखनऊ, दिल्ली का सफर आसान हो गया है। मगर मंडल मुख्यालय से ब्लॉक, तहसील, कस्बा, बाजार तक की लोकल यात्रा कठिन हो गई है। यहां पहुंचने के लिए साधन ही नहीं उपलब्ध है। मंडल के तीनों जिलों को जोड़ने वाले आधा दर्जन रूटों में से केवल दो से तीन रूट पर ही निजी बसों को परमिट मिल पा रहा है। ऐसे में बस कारोबारी लोकल रूट पर बस चलवाना ही छोड़ दे रहे हैं। पुराने जर्जर बस ही लोकल रूट पर चलाए जा रहे हैं। इसके अलावा लखनऊ, दिल्ली तक की सफर कराने वाली निजी बसें यदि इन कस्बों से गुजरती है तो उसमें लोकल यात्रियों को नहीं बैठाया जाता है। विवश होकर लोग ऑटो, मैजिक के सहारे महंगे किराए पर सफर पूरी कर रहे हैं।
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इन रूटों पर बंद हैं परमिट
लोकल रूटों में शामिल बस्ती वाया कलवारी दुबौलिया, बस्ती- बॉसी, बस्ती- महुली, बस्ती- डुमरियागंज रूट पर परिवहन विभाग की ओर निजी बसाें के लिए परमिट देना बंद कर दिया गया है। अब इन रूटों पर डग्गामार बसों का ही संचलन हो पा रहा है। इनकी भी संख्या बहुत कम हो गई है। क्योंकि अधिकांश बसें इन रूटों से होकर लखनऊ तक की यात्रा कराने लगी है।
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इन रूटों पर मिल रही परमिट
बस्ती- नंदौर, बस्ती- बभनान, हर्रैया- बभनान रूटों पर बसों को परमिट मिल रहा है। लेकिन, इन रूटों पर भी पुरानी बसें ही बची है। जिनसे यात्रा करने में खतरा भी है और समय ज्यादा लगता है।
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दो रूट पर मिल रही सरकारी बस सेवा
मंडल मुख्यालय से डुमरियागंज और सिद्धार्थनगर रूट पर ही सरकारी बस सेवा बहाल है। इनकी भी संख्या सवारियों के हिसाब से कम है। बस्ती से डुमरियागंज और बढ़नी तक केवल चार से पांच बस 24 घंटे में संचालित होती है। इसी तरह सिद्धार्थनगर रूट पर भी 5 से 6 बसों का संचालन किया जा रहा है। जबकि इन रूटों पर हर घंटे 50 से 60 यात्री वाहनों की तलाश में देखे जा रहे हैं। उन्हें ऑटो, मैजिक के सहारे यात्रा पूरी करनी पड़ रही है। इसके अलावा बस्ती- कलवारी, बस्ती- मेंहदावल पर बमुश्किल एक से दो बसें ही दौड़ाई जा रही है। वह भी नियमित नहीं है। जबकि बस्ती वाया बभनान गोंडा रूट पर एक भी बस सेवा बहाल नहीं है।
15 किमी के बजाय 50 से 100 किमी दौड़ रहे ऑटो
लोकल रूटों पर बसों की संख्या कम होने से ऑटो वाहन सवारियां लेकर 50 से 100 किलोमीटर की दौड़ लगा रहे हैं। ऑटो वाहन रोडवेज, रेलवे स्टेशन से सवारियां भरकर डुमरियागंज, सिद्धार्थनगर तक दौड़ रहे हैं। जबकि इन्हें 15 किलाेमीटर की दूरी में चलने के लिए परमिट मिला हुआ है।
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लोकल रूटों पर बसों का संचालन कराया जा रहा है। सवारियां जुटने पर बस मुहैया करा दी जाती है। प्रयास रहता है कि सभी लोकल रूट पर बस सेवा बहाल रखी जाए।
आयुष भटनागर, एआरएम
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कुछ रूटों पर शासन स्तर से परमिट प्रतिबंधित है। इसके अलावा अन्य रूटों पर परमिट निर्गत किया जा रहा है। डग्गामार वाहनों पर रोक के लिए कार्रवाई लगातार की जा रही है।
पंकज सिंह, एआरटीओ, प्रवर्तन