बस्ती। राम नगर ब्लॉक के नरखोरिया गांव में मनिता की खुदकुशी ने एक बार फिर समूह कर्ज के जाल में फंसकर छटपटा रहीं महिलाओं की हालत को उजागर कर दिया है। समूहों के एजेंट कर्ज लेने वाले परिवार, खासकर महिलाओं पर मानसिक दबाव बनाकर उनका जीना मुहाल किए हुए है। यह घटना इसकी बानगी है। कर्ज होने की वजह से ऐसी सैकड़ों महिलाएं किसी से शिकायत भी नहीं कर पा रही हैं। अंदर ही अंदर घुट-घुटकर छुटकारा पाने की कोशिश में जान देने पर विवश हो जा रही हैं।
मनिता की बेटी शिवांगी बताती है कि पिता बसंत सोनी की माली हालत काफी खराब है। रुपये की जरूरत पड़ने पर कुछ जमीन गिरवी रख दी गई थी। भाई की शादी में भी काफी खर्च हो गए थे। इन सबके लिए उसकी मां ने करीब ढाई लाख रुपये तीन-चार समूहों से कर्ज ले लिया था। धीरे-धीरे यह कर्ज बढ़कर करीब चार लाख रुपये हो गया था। हालांकि काफी रुपये मां जमा कर चुकी थी। एक लाख के करीब ही बाकी था। मार्च तक सब जमा कर देती लेकिन एजेंट एक बात भी सुनने को तैयार नहीं था।
पति बसंत सोनी बताते हैं कि बुधवार को एजेंट आए थे। कह रहे थे कि कल सुबह फिर आऊंगा और रुपये लेकर ही जाऊंगा। उनसे पत्नी ने कहा कि रुपये नहीं हैं तो क्या जान दे दें, तो एजेंट कहने लगे कि जान दो चाहे जो करो लेकिन हमें किस्त के रुपये हर हाल में चाहिए। बृहस्पतिवार को सुबह भी एजेंट का फोन आया था लेकिन बसंत ने जब इस घटना के बारे में बताया तो फोन कट गया। गांव के लोग बताते हैं कि बसंत कहीं झूठ तो नहीं बोल रहा है इसकी तस्दीक करने भी एक आदमी आया था मगर शव देखकर वह लौट गया। पिता बसंत बताते हैं कि बेटी शिवांगी की भी शादी तय थी। अप्रैल में कार्यक्रम संपन्न होना है। इसके लिए पत्नी मनिता अभी से इंतजाम करने में जुटी थी।
बेटी की शादी की तैयारी अधूरी रह गई
- शिवांगी की शादी अप्रैल में तय थी। परिवार की खुशी की तैयारियां शुरू ही हुई थीं कि मातम ने घर को घेर लिया। गांव की महिलाओं का कहना है कि मनिता बहुत सीधी और मेहनती थी। बेटी की शादी के लिए जोरशोर में लगी थी। अब घर में जो कपड़े और साड़ियां शादी के लिए खरीदी गई थीं।
अब भी परेशान सियरापार की महिलाएं
- ऐसा ही मामला शहर से सटे सियरापार गांव में एक साल पहले सामने आया था जिसके लिए धरना प्रदर्शन तक हुआ था। वहां की 30 से ज्यादा महिलाओं के नाम पर विभिन्न बैंकों के 89 लाख रुपये कर्ज है। इन सबने लोन लेने से इन्कार किया था मगर एजेंट कहने लगे कि लोन के रुपये उन्हें दे देना वे ब्याज और मूल धन जमा करते रहेंगे। इसके बदले उन्हें हजार-दो हजार रुपये दे दिए। इसी दो हजार की लालच में उन लोगों के कई बार हस्ताक्षर बनवाए और आधार, पैन कार्ड की फोटो कॉपी ले गए। अब वहां की तमाम महिलाएं जैसे मीरा पत्नी राम शंकर के नाम पर दो लाख रुपये, निर्मला पत्नी गाेमती के नाम पर 1.80 लाख, सुनीता पत्नी शिव प्रसाद के नाम पर 1.50 लाख रुपये की कर्जदार हो गईं। इन लोगों ने बताया कि उन्हें दो-चार बार बैंक में ले जाया गया। कई बार बैंक के लोग घर पर ही पहुंच जाते थे। उनके परिवार में इसे लेकर झगड़े होने लगे हैं। अब वे न्याय के लिए पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के चक्कर काट रही हैं।