अपनों के बीच फिजी से आए रविंद्र दत्त। संवाद
बस्ती। फिजी में रह रहे रविंद्र दत्त बनकटी ब्लॉक के कबरा गांव में अपनों से मिलने के बाद जाते वक्त पुरखों की माटी में परदादा गरीब राम के नाम वृद्धा आश्रम खोलने का संकल्प लेकर रवाना हो गए।
अपनों से विदाई लेते के वक्त उनके तथा उनकी पत्नी केशनी की आंखों से आंसू छलक आए थे तो खानदानी भी फफक पड़े। कबरा गांव से विदाई लेने के बाद वह दिल्ली में भी रुकेंगे। क्योंकि वहां भी खानदान के लोग रहते हैं। इनसे मेल-मिलाप के बाद मंगलवार को फिजी रवाना हो जाएंगे। कबरा गांव निवासी गोरखनाथ चौधरी के बेटे सोनू चौधरी ने बताया कि रविंद्र दत्त रिश्ते मेंं उनके बाबा लगते हैं। रविंद्र के पिता का नाम बैजनाथ है। फिजी से अयोध्या में रामलला का दर्शन कर बस्ती तहसीलदार सहित अधिकारियों से मिलकर गांव का सजरा निकाल कर तलाशते-तलाशते बनकटी के कबरा गांव पहुंचे तो गांव के बुजुर्गों से परदादा गरीब राम के बारे में जानकारी ली और उनके नाम करीब 9 धूर जमीन भी मिली।
सोनू ने फिजी से आए पर बाबा रविंद्र दत्त से मिली जानकारी के अनुसार बताया कि गरीब राम के पिता का नाम राम दत्त था। 18 साल की उम्र में गरीब राम को वर्ष 1910 जून को ब्रिटिश हुकूमत ने कोलकाता जेल में बंद कर दिया और सभी भारतीय बंदियों को पानी के जहाज से महासागर के एक टापू पर ले जाकर छोड़ दिया, जहां गिरगिटिया मजदूरों से चंदन की कटवाई जाती और खेती भी कराई जाती थी।
काफी संघर्ष करने के बाद फिजी के आदिवासियों के साथ मिलकर अंग्रजों से लड़ाई लड़ी तो 1970 में फिजी स्वतंत्र हुआ तो वहां बस गए। उसने बताया कि फिजी में चाचा राम अवतार, जगन्नाथ, वैजनाथ ,गीता नारायण सहित 150 परिवार के लोग रहते हैं।