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Basti News: सहालग में मजबूत नेटवर्क के जरिये धंधेबाज खपाएंगे मिलावटी पनीर...बिगड़ेगी सेहत

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बस्ती। सहालग का दौर मंगलवार से शुरू हो रहा है। इस बीच मिलावटी पनीर की बिक्री तेज हो जाएगी। मांग अत्यधिक होने के चलते धंधेबाज दूध के बजाय रिफाइंड, मैदा, आरारोट और मिल्क पाउडर मिलाकर पनीर तैयार कर रहे, जो आयोजनों में मजबूत नेटवर्क के जरिये खपाने में सफल होंगे। वहीं, मांग बढ़ते ही पनीर का रेट भी बढ़ा दिए हैं। 240 रुपये किलो मिलने वाला मिलावटी पनीर 280 रुपये में हो गया है। जबकि थोक में असली पनीर साढ़े तीन से चार सौ रुपये में मिलता है और चार से साढ़े चार सौ किलो में फुटकर बिक्री होती है।
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अयोध्या, अंबेडकरनगर, नवाबगंज, बलरामपुर से मिलावटी पनीर की खेप जिले में लाई जा रही है। साथ ही जनपद के कलवारी, बहादुरपुर, बभनान और बनकटी क्षेत्र में मिलावटी पनीर बनाकर शहरों तक लाकर इसे खपाया जा रहा है। सहालग में मांग बढ़ने पर धंधेबाज मिलावट तेज कर देते हैं। दूध में मैदा व अरारोट मिलाकर पनीर तैयार की जा रही है। यह सेहत के लिए हानिकारक है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के लिए गए 100 नमूनों में से 50 फेल हुए हैं। दो में विदेशीवसा, रिफाइंड व मैदा की पुष्टि हुई है। साथ ही सहालग में पाउडर के दूध से पनीर बनाकर धंधेबाज मोटा मुनाफा कमा रहे हैं।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की ओर से बीते माह पनीर के भेजे गए 100 नमूनों की जांच रिपोर्ट प्राप्त हुई है। जिसमें 50 नमूने फेल हुए हैं। 48 नमूनों में फैट की कमी मिली, जो अधोमानक श्रेणी में है, जबकि दो नमूने अनसेफ की श्रेणी में थे। उसमें मिलावट की पुष्टि हुई थी। ऐसे संचालकों को नोटिस जारी किया गया है। बताते हैं कि धंधेबाज बगैर फैट वाला पनीर बेचकर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। धंधेबाजों के मजबूत नेटवर्क के चलते मिलावटी पनीर की बिक्री कम नहीं हो रही है। सूत्रों की माने तो शहर में भी कुछ स्थानों पर पनीर बनाया जाता है। पाउडर वाले दूध में मैदा व आरारोट मिलाकर पनीर बना दिया जाता है।
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मांग अधिक होने के कारण शुद्धता पर अधिक ध्यान नहीं दिया जाता है। 15 अप्रैल को शहर में जिले में 200 से अधिक शादियां होने वाली हैं। इसके लिए पनीर की बुकिंग हो चुकी है। इसमें अधिकतर पनीर मिलावटी होंगे, क्योंकि मांग के अनुसार उतना पनीर बिना दूध के बना पाना संभव नहीं है। गर्मी में दूध का उत्पादन भी अचानक कम हो जाता है। ऐसे में पनीर बनाने को धंधेबाज पाउडर दूध, रिफाइंड, मैदा, आरारोट का सहारा लेते हैं।
सूत्रों की मानें तो धंधेबाज बुकिंग तिथि के दिन भी आपूर्ति कर रहे हैं। बाहर से आने वाले पनीर को सिर्फ एकाध कैरेट डिब्बाबंद अपने पास स्टॉक करते हैं, शेष सेटिंग वाले जगह पर स्टॉक करके रखते हैं। सबसे अधिक पनीर बस्ती जिले के लिए अंबेडकरनगर से आ रहा है। जिले में भी पनीर बनता है लेकिन अधिक मात्र में बाहर से ही मंगाया जाता है। नगर, सांऊघाट, हर्रैया, गांधीनगर समेत अन्य क्षेत्रों में मिलावटी पनीर बनाने का धंधा किया जा रहा है। बता दें कि हाल ही में शहर के मंगला कॉलोनी में एक नकली पनीर फैक्टरी में छापेमारी हुई थी। सिंथेटिक दूध, रसायन, रिफाइंड पाया गया था। पनीर जब्त करके नष्ट कराया गया था। जांच में पनीर में मिलावट की पुष्टि हुई थी। इसी प्रकार गनेशपुर में संतकबीरनगर से नकली पनीर मंगवाकर हर्रैया ले जाते समय पकड़ा गया था। जांच में इसमें मिलावट की पुष्टि हुई थी। मामले में तीन लोगों पर प्राथमिकी दर्ज हुई थी। साथ ही एक वाहन भी जब्त कर लिए थे।


मिलावटी पनीर के सेवन से पेट की बढ़ेगी बीमारी, फूड पॉइजनिंग
जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. एसडी ओझा के अनुसार, मिलावटी व खराब पनीर खाने से पेट संबंधी कई बीमारियां बढ़ जाती हैं। पेट में ऐंठन-मरोड़, उल्टी-दस्त, त्वचा पर चकत्ते, फूड पॉइजनिंग और लिवर व किडनी को गंभीर नुकसान हो सकता है। इसमें मौजूद हानिकारक फॉर्मेलिन जैसे रसायन कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां पैदा कर सकते हैं और बच्चों में हार्मोनल असंतुलन का कारण बन सकते हैं।

मिलावटी पनीर के धंधेबाजी के खिलाफ अभियान लगातार चल रहा है। अब तक कई फैक्टरी बंद करवा दी गई है। खराब क्वालिटी का पनीर नष्ट कराया गया था। 15 अप्रैल से अभियान चलेगा। जिसके लिए पांच सदस्यीय टीम लगा दी गई है। जो पनीर के इधर सैंपल फेल आए हैं, संचालकों को नोटिस जारी किया गया है।
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चितरंजन कुमार सिंह, जिला अभिहित अधिकारी, बस्ती
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