बस्ती। फर्जी हैवी डीएल प्रकरण की विभागीय जांच पूरी हो चुकी है। वहीं, प्रशासन भी अपनी रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेज चुका है। शासन स्तर पर जांच पूरी होते ही मामले में अब आरआई कार्यालय में तैनात तीन आउटसोर्स कर्मियों को हटा दिया गया है। जबकि लिपिक का गोरखपुर स्थानांतरण कर दिया गया है। इस कार्रवाई से विभाग में हड़कंप मच गया है।
बस्ती आरआई कार्यालय से बस्ती, मिर्जापुर, गोंडा, बागपत समेत विभिन्न जिलों के रहने वाले लोगों के नाम लगभग 4500 फर्जी हैवी डीएल सारथी पोर्टल से जारी कर दिया गए थे। इस फर्जीवाड़े में स्थानीय अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध है। क्योंकि आरआई कार्यालय में आरआई स्तर से चहेते आटससोर्स कर्मियों को सारथी पोर्टल पर डीएल अप्रूवल के लिए अधिकृत कर दिया गया था।
आउटसोर्स कर्मियों के जरिये दलालों के सिंडीकेट ने मन चाहे बस्ती समेत गैर जनपद के व्यक्तियों का हैवी डीएल जारी करवा दिया था। सूत्रों के अनुसार, विभागीय जांच में आरआई की भी भूमिका संदिग्ध पाई गई थी। बाद में आरआई सीमा गौतम को एक दूसरे प्रकरण में निलंबित कर दिया गया था। जानकारों का कहना है कि इसमें विभाग के बड़े अधिकारी भी इस पूरे खेल को जानकर भी अनजान बने हुए थे। लेकिन बड़ी रसूख के चलते विभागीय जांच के दायरे से बड़े अधिकारी अभी तक बाहर हैं।
जबकि सारथी पोर्टल से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आउटसोर्स कर्मी के स्तर से डीएल जारी किए गए थे। डीएल की जांच-पड़ताल अधिकारियों ने कभी नहीं की। यहां तक कि जिन फर्जी डीएल की जांच चल रही है उससे संबंधित पत्रावली पर किसी अधिकारी या बाबू की रिपोर्ट तक नहीं लगी है। आरआई कार्यालय में डीएल संबंधी कार्यों के लिए अधिकारियों ने विभागीय बाबू की तैनाती ही नहीं की है।