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इस बार टूटेगी 57 साल की परंपरा, नहीं होगी रामलीला

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इस बार टूटेगी 57 साल की परंपरा, नहीं होगी रामलीला
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गौर (बस्ती)। 57 साल से बभनान बाजार में रामलीला का मंचन किया जा रहा था, लेकिन इस बार कोरोना महामारी के चलते इसे स्थगित कर दिया गया है। समिति सदस्यों ने बताया कि यदि आयोजन किया गया तो कोविड-19 की गाइड लाइन का पालन करा पाना मुश्किल होगा।
बभनान कस्बे में पहली बार वर्ष-1962 में रामलीला का मंचन किया। कस्बा निवासी सीताराम जायसवाल ने आदर्श रामलीला समिति का गठन किया था। इसमें चेतन प्रसाद कमलापुरी, बद्री प्रसाद (प्रधान), भागेलू प्रसाद अग्रहरि, सुंदरलाल पटवा आदि सदस्य थे। गुड़ मंडी के सामने स्थित रामलीला मैदान में हर साल मंचन किया जाता था। समिति के संस्थापक सदस्यों के निधन के बाद अब राधेश्याम जायसवाल इसके अध्यक्ष हैं। उन्होंने बताया कि कोरोना संक्रमण के कारण इस साल मंचन की तैयारियां रद्द कर दी गई हैं।
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रामलीला मंचन के लिए अयोध्या से कलाकर बुलाए जाने की परंपरा थी। जनसहयोग से मिले धनराशि से ही मंचन और कलाकारों का खर्च वहन किया जाता था। कमेटी महामंत्री महेश पटवा, उपाध्यक्ष सियाराम कसौधन, मंत्री महेश कमलापुरी, सचिव रोमी कमलापुरी व कोषाध्यक्ष संपूर्णानंद जायसवाल आदि ने बताया कि रामलीला मनोरंजन, धार्मिक भावों के प्रसार के साथ व्यवसाय का भी जरिया है। जब रामलीला होती थी तब आसपास के गांवों के लोगों से कस्बा खचाखच भर जाता था। ऐसे में बिक्री बढ़ जाती है। मंचन कलाकार आशीष झा, विश्राम पांडेय, संतोष, सूर्य कुमार, विशाल ने बताया कि रामलीला न होने से वे दुखी हैं।
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