बस्ती। उफ! ये भीड़...। किस बोगी में घुसें। किस रास्ते अंदर जाएं। हर तरफ यात्री। दरवाजे से लेकर बर्थ तक, फर्श से लेकर वाशरूम तक भीड़। दौड़ो, भागो कितना भी, फिर भी न चढ़ने की गुंजाइश न खड़े होने का कोई दांव। ऐसी यात्रा का तो भगवान ही मालिक है। मुंबई, दिल्ली, गुजरात तक दौड़ लगाने वाली लगभग सभी ट्रेनों का हाल एक जैसा है। अधिकतर लोग ठसाठस भीड़ देखने के बाद ट्रेन में घुसने की हिम्मत नहीं जुटा रहे हैं। और स्टेशन से लौट जा रहे हैंं।
शनिवार को बस्ती रेलवे स्टेशन का नजारा कुछ ऐसा ही था। दोपहर 12:50 बजे सूचना प्रसारित हुई कि गोंडा, लखनऊ के रास्ते दिल्ली तक जाने वाले यात्रियों के लिए छपरा-दरभंगा एक्सप्रेस प्लेटफार्म पर नंबर दो पर आ रही है। यात्रियों के कदम उस ओर बढ़ चले। बैग, ब्रिफकेश आदि के साथ भीड़ प्लेटफार्म नंबर एक से दो पर आ गए। कुछ ही देर में ट्रेन भी आ गई। प्लेटफार्म पर यात्रियों का दौड़ भाग शुरू। अंदर ठसाठस भीड़ थी। उसमें से किसी को उतरने की जिद, तो अधिकतर पर बाहर से अंदर ट्रेन में चढ़ने का जुनून था। बैठने के लिए सीट छोड़िए, बोगी में खड़े होने के लिए भी जद्दोजहद थी। कुछ एसी डिब्बों के फाटक अंदर से बंद थे। स्लीपर और जनरल डिब्बों के गेट के पास सामान भर दिए गए थे। उसकी ओट लेकर यात्री खड़े थे। भीड़ ऐसी कि दाहिने-बाएं होने की भी जगह नहीं। शरीर से मजबूत लोग तो किसी तरह बोगियों में दाखिल हुए लेकिन कमजोर दिल के लोग कदम पीछे खींच लिए। उन्हें वापस होना पड़ा। इसके कुछ देर बाद प्लेटफार्म नंबर तीन पर रायपुर (छत्तीसगढ़) एक्सप्रेस पहुंची। इसमें भी वहीं हाल। गोरखपुर, देवरिया तक की यात्रा करने वाले लोग जनरल टिकट पर एसी कोच में घुस गए। स्लीपर डिब्बों में घुसने की जगह ही नहीं थी।
आजकल रेल यात्रा का दृश्य यही है। अधिकतर ट्रेनें फुल चल रही हैं। वेटिंग टिकट पर यात्रा किसी यातना से कम नहीं है। आरक्षण फुल होने की स्थिति में लोगों को फर्श पर बैठकर या खड़े होकर ही लंबी यात्रा करनी पड़ रही है।
अप-डाउन 52 ट्रेनों में सीट नहीं
इन दिनों बस्ती रेलवे स्टेशन से होकर गुजरने वाली अप-डाउन 52 ट्रेनों में अगले 15 दिनों के लिए बर्थ फुल है। यह समस्या पूरे जून माह बरकरार रहने की संभावना है। मुंबई, दिल्ली, गुजरात, लखनऊ, कोलकाता आदि महानगरों की यात्रा कठिन हो गई है। यात्रियों की संख्या भी सामान्य दिनों की अपेक्षा बढ़ी हुई है। ऐसे में ट्रेनों में तत्काल सीट मुहैया होना मुश्किल है। वैशाली, सत्याग्रह, कुशीनगर, गोरखधाम, लोकमान्य तिलक आदि प्रमुख ट्रेनें फुल चल रही हैं।
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साप्ताहिक और मासिक स्पेशल ट्रेनों का लाभ नहीं
भीड़ को देखते हुए अप-डाउन मिलाकर आठ स्पेशल ट्रेनें बढ़ा दी गई है। लेकिन यह भी बहुत मददगार नहीं है। क्योंकि इनका संचलन साप्ताहिक और महीने में एक बार है। 5011 अप एवं 5012 डाउन गोरखपुर- जयपुर एक्सप्रेस साप्ताहिक चलाई गई है। यह माह के 8, 15, 22 एवं 29 तारीख को यहां से चल रही है। इसके अलावा 5063 अप एवं 5064 डाउन छपरा एलटीटी स्पेशल ट्रेन माह में एक बार 9 तारीख को यहां से चलाई जा रही है। डाउन माह के 11 तारीख को आएगी। 5053 अप एवं 5054 डाउन गोरखपुर-बांद्रा एक्सप्रेस माह के 9 तारीख को यहां से निकल रही है। ये ट्रेनें भी फुल चल रही हैं।
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इन्होंने रद्द कर दी अपनी यात्रा
भीड़ को देखते हुए लोग अपनी यात्रा रद्द कर दे रहे हैं। वह गंतव्य तक जाने के लिए दूसरा विकल्प खोज रहे हैं। आरक्षण काउंटर पर टिकट बुक कराने वालों की तुलना में टिकट निरस्त कराने वालों की भीड़ कम नहीं है। शुक्रवार को 65 लोगों ने एसी और स्लीपर कोच का वेटिंग टिकट निरस्त कराया। जबकि शनिवार को सुबह 11 बजे तक प्रतीक्षारत 43 टिकट कैंसिल कराए गए।
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15 दिन पहले दिल्ली के लिए गोरखधाम एक्सप्रेस में स्लीपर श्रेणी में चार टिकट बुक कराया था। यह कंफर्म नहीं हो पाया। वेटिंग 200 से अधिक है। ट्रेन में भीड़ ज्यादा है। इसलिए परिवार के साथ यात्रा सुखद नहीं हो पाएगी। मजबूरी में टिकट रद्द कराना पड़ा। अब बस एवं दूसरे साधन का इंतजाम करेंगे। -सागर गौड़, पुरानी बस्ती।
आए थे मुंबई के लिए एलटीटी ट्रेन पकड़ने। साथ में तीन लोग और भी हैं। 280 नंबर वेटिंग टिकट पहले से लिए थे। कंफर्म नहीं हुआ। जाना जरूरी था इसलिए स्टेशन आ गए। यहां ट्रेन में चढ़ने तक की गुंजाइश नहीं थी। यात्रा लंबी करनी है। इसलिए हिम्मत हार गए। अब वापस घर जा रहे हैं। दूसरी व्यवस्था करेंगे। -राम पाल चौरसिया, मुंडेरवा।
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सभी ट्रेनें फुल चल रही हैं। जून तक यह दिक्कत रहेगी। यात्रियों को आरक्षण काउंटर पर पूरी सुविधा दी जा रही है। उन्हें तत्काल टिकट भी दिया जा रहा है। यात्रियों के आवेदन पर टिकट निरस्त भी किए जा रहे हैं। -एके पाठक, चीफ रिजर्वेशन काउंसलर
ट्रेन की बोगी में भीड़ के कारण कपड़े से झूला बनाकर बैठा यात्री।