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Basti News: गोवा जैसा न हो हादसा...लापरवाही यहां भी ज्यादा

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बस्ती। आकस्मिक स्थित में बाहर निकलने का रास्ता न होने की वजह से शनिवार को गोवा के एक नाइट क्लब में शनिवार को दिल दहला देने वाला अग्निकांड हुआ था। जिसमें कर्मचारी और पर्यटक सहित 25 लोगों की मौत हो गई। बस्ती शहर व कस्बों में भी ऐसे तमाम होटल, मैरिज हॉल और अन्य प्रतिष्ठान हैं, जहां फायर सेफ्टी की हालत चिंताजनक है। ज्यादातर हॉल में न इमरजेंसी एग्जिट, न स्मोक सेंसर, न अलार्म सिस्टम और ऊपर से साउंड-लाइटिंग की ओवरलोडेड वायरिंग मिल जाएगी।
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जिले में दो सौ से ज्यादा होटल, रेस्त्रां, मैरिज हॉल-लॉन आदि संचालित हैं। इनमें से महज 26 प्रतिष्ठानों की फायर एनओसी ली गई है। बाकी अवैध रूप से चल रहे हैं। 10 अप्रैल को फव्वारा तिराहे पर स्थित होटल में आग लग गई थी। हालांकि उस समय होटल का उद्घाटन हुए दो-तीन दिन ही हुए थे और ग्राहकों का ज्यादा आवागमन नहीं था लेकिन शहर में सनसनी फैल गई थी। फायर विभाग के सूत्रों के अनुसार, शहर में बड़ी संख्या में होटल हॉल, मैरिज लॉन, बैंक्वेट स्पेस और कॉर्पोरेट ऑडिटोरियम ऐसे हैं जहां सुरक्षा इंतजाम नगण्य हैं।

जबकि हर सप्ताह सैकड़ों लोग ऐसे स्थानों पर आयोजन के लिए इकट्ठे होते हैं, वे दरअसल संभावित दुर्घटनाओं के खतरे से खाली नहीं हैं। कानूनी रूप से अनिवार्य फायर सेफ्टी मानकों पर खरे ही नहीं उतरते। वरिष्ठ नागरिक राज कुमार सिंह बताते हैं कि अधिकांश होटल अधिक भीड़ आकर्षित करने के लिए हॉल को चमकदार लाइटिंग, साउंड सिस्टम और सजावट से लैस तो करते हैं, पर सुरक्षा मानकों पर खर्च करना उन्हें अनावश्यक खर्च लगता है।
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सामाजिक कार्यकर्ता विनोद श्रीवास्तव कहते हैं कि शहर के कई प्रतिष्ठित होटलों-रेस्टोरेंट में भी आपातकालीन निकास या फायर एग्जिट दरवाजे नहीं, या जो हैं वे सजावटी दीवारों और पर्दों के पीछे छुपे मिलते हैं। कई जगहों पर इन दरवाजों के बाहर सामान, कुर्सियां या खाली क्रेट भरे पड़े रहते हैं, जिससे आपात स्थिति में बाहर निकलना असंभव हो जाता है।





ओवरलोडेड वायरिंग हॉल को बनाती है चलती-फिरती चिंगारी



सेवानिवृत्त अग्निशमन अधिकारी रवींद्र प्रसाद बताते हैं कि अधिकांश होटल हॉल में उपयोग होने वाली वायरिंग ‘इवेंट लोड’ के हिसाब से नहीं होती है। शादी, संगीत समारोह या कॉर्पोरेट इवेंट में साउंड सिस्टम, डीजे, लाइटिंग, प्रोजेक्टर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के कारण लोड कई गुना बढ़ जाता है। कई स्थानों पर यह पूरी तरह अस्थायी वायरिंग पर चलाया जाता है, जिसके तार छत के कपड़ों के नीचे या सजावटी पर्दों में छिपा दिए जाते हैं। यह स्थिति स्पार्किंग और शॉर्ट-सर्किट का बड़ा कारण बन सकती है।





दिखावे के अग्निशामक यंत्र

- शहर में फायर लाइसेंस लेने के लिए होटल संचालक कागजों पर स्मोक सेंसर, अलार्म सिस्टम, हाइड्रेंट, स्प्रिंकलर और अग्निशामक यंत्र दिखा देते हैं। लेकिन जब वास्तविक निरीक्षण किया जाता है तो इनमें से आधे उपकरण या तो काम नहीं करते, या कभी इंस्टॉल ही नहीं किए गए होते। कुछ मामलों में अग्निशामक यंत्र ऐसे पाए गए जिन्हें पिछले 4-5 साल से न तो सर्विस किया गया और न ही बदला गया। कई होटल तो धुआं भरने की चेतावनी देने वाला कोई सिस्टम ही नहीं रखते। यानी, दुर्घटना होने पर लोगों को घटना का पता तब चलेगा जब धुआं उनकी सांसें रोकना शुरू कर देगा।





कोट....



- शहर के होटलों-रेस्तराओं की नियमित जांच की जाती है। ज्यादातर में अग्निशमन यंत्र लगाए गए हैं। कुछ बिना एनओसी के संचालित किए जाने की सूचना मिली है। उन पर नियमानुसार कार्रवाई प्रचलित है। लोगों को खुद भी इसे लेकर सतर्क रहना चाहिए।
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- यतींद्रनाथ, मुख्य अग्निशमन अधिकारी
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