कलवारी। भगवान के सम्मुख और उनके शरणागत होने का एक मात्र साधन भागवत कथा है। भागवत कथा से कल्याणकारी और कोई दूसरा साधन भी नहीं है इसलिए मनुष्य को व्यस्त जीवन से समय निकालकर कथा सुनना चाहिए क्योंकि भागवत कथा से बड़ा कोई सत्य नहीं है। भागवत कथा अमृत के समान है।
यह सद्विचार अवधधाम से आये कथावाचक शिवशंकर शास्त्री ने कलवारी गांव में चल रहे सात दिवसीय संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा के पहले दिन ब्यास पीठ से प्रवचन सत्र में व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि कथा को पांचवां वेद कहा गया है, जिसे पढ़ सकते हैं और सुन भी सकते हैं। कृष्ण हिन्दू धर्म में विष्णु के अवतार हैं। सनातन धर्म के अनुसार भगवान विष्णु सर्वपापहारी पवित्र और समस्त मनुष्यों को भोग तथा मोक्ष प्रदान करने वाले प्रमुख देवता हैं।
जब-जब इस पृथ्वी पर असुर एवं राक्षसों के पापों का आतंक व्याप्त होता है तब-तब भगवान विष्णु किसी न किसी रूप में अवतरित होकर पृथ्वी के भार को कम करते हैं। वैसे तो भगवान विष्णु ने अभी तक तेईस अवतारों को धारण किया। लेकिन इन अवतारों में उनके सबसे महत्वपूर्ण अवतार श्रीराम और श्रीकृष्ण का अवतार है।
कथा में मुख्य यजमान चंद्र प्रकाश सिंह तथा पुष्पा सिंह, सुरेश, संकटा, महिपाल सिंह, दीप नारायण, दुर्गेश सिंह हरकेश सिंह नीरज राजेंद्र सिंह, अजीत, राम लखन सिंह, अभय सिंह, मोहनलाल, जनरल सिंह, अमित अग्रहरि आदि उपस्थित रहे।