संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। पीडब्ल्यूडी और कुछ अन्य कार्यदायी संस्थाएं किसी तरह सड़कों को चमकाने में जुटी हैं। मगर, पाइपलाइन डालने के चक्कर में यह टिकाऊ नहीं हो पा रही हैं।
शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र तक की सड़क और पटरियों का यही हाल है। कहीं अमृत पेयजल योजना तो कहीं गैस की पाइपलाइन के लिए सड़क की खोदाई कर एक ही रात में बदहाल बना दी जा रही हैं।
शासन के निर्देश पर सड़कों की हालत चार-पांच साल से लगातार सुधारी जा रही है। इस पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च भी हो रहे हैं। मगर, अन्य निर्माण एजेंसियों को इसकी चिंता नहीं है।
इन दिनों जल जीवन मिशन और गैस पाइपलाइन का भी कार्य जोर पकड़े हुए है। पाइपलाइन का कार्य करने वाली एजेंसियां पीडब्ल्यूडी या नगर पालिका से सड़क या उसकी पटरी को खोदने की अनुमति भी नहीं लेती है।
सीधे मशीनों से खोदाई कर अंडरग्राउंड पाइपलाइन बिछाने का कार्य शुरू कर दिया जा रहा है। इसके बाद फावड़े से अगल-बगल की मिट्टी गड्ढे में डालकर टीम आगे बढ़ जा रही है। इसमें भारी वाहनों के पहिए पड़ते ही मिट्टी धंस जाती है। सड़क पर भी मिट्टी फैल रही है। सड़क की पटरी पर खोदाई की जगह दूर तक गड्ढे में तब्दील हो जाती है।
लंबे समय के बाद बस्ती-कांटे मार्ग छह माह पहलेनकर तैयार हुआ है। इस पर 19 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। पीडब्ल्यूडी की यह सड़क अब चमचमाती हुई दिख रही है। एक सप्ताह पहले जिगिना गांव के पास इस सड़क की एक तरफ की पटरी खोदकर जल जीवन मिशन योजना के तहत पाइपलाइन बिछाई गई है। इस मार्ग पर कनपुरवा, झलकटिया के पास भी सड़क के किनारे गैस पाइपलाइन बिछाकर मरम्मत ठीक से नहीं कराई गई है। े