बस्ती। सरयू नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से बस्ती के तटीय इलाकों में बाढ़ का संकट गहरा गया है। बृहस्पतिवार को नदी का जलस्तर पांच सेंटीमीटर और बढ़ गया। केंद्रीय जल आयोग के अयोध्या कार्यालय के अनुसार शाम पांच बजे सरयू का जलस्तर 93.12 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 92.73 मीटर से 39 सेंटीमीटर ऊपर है। नदी के उफान से 25 से अधिक गांव प्रभावित हैं। कई गांवों में घरों और अहातों में पानी घुस गया है, जबकि संपर्क मार्ग जलमग्न होने से आवागमन प्रभावित है।
बाढ़ के कारण ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित हुई है। घरों में पानी भरने से जलावन की लकड़ी भीग गई है और कई परिवारों के सामने खाना पकाने तक का संकट खड़ा हो गया है। पानी से घिरे लोगों को जहरीले जलीय जीव-जंतुओं का भी डर सता रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि उपलब्ध नावें पर्याप्त नहीं हैं। किसी के बीमार पड़ने, प्रसव की स्थिति बनने या रात में जलस्तर अचानक बढ़ने पर सुरक्षित निकासी को लेकर भी चिंता बनी हुई है।
ग्रामीणों का आरोप है कि बाढ़ प्रभावित परिवारों तक पर्याप्त राहत सामग्री नहीं पहुंच रही है। खेतों में पानी भरने से धान, गन्ने समेत अन्य फसलें बर्बाद होने लगी हैं, लेकिन क्षतिपूर्ति के लिए फसलों के नुकसान का मूल्यांकन नहीं किया जा रहा है। इससे प्रभावित किसानों के सामने आर्थिक संकट गहराने की आशंका है।
बाढ़ के चलते दो विद्यालय बंद, दूसरे स्कूलों में भेजे गए बच्चे
सरयू के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए दुबौलिया क्षेत्र के माझा स्थित प्राथमिक विद्यालय रुदलपुरवा को बंद करा दिया गया है। विद्यालय परिसर में बाढ़ का पानी पहुंचने के कारण यहां पंजीकृत 69 बच्चों की पढ़ाई उच्च प्राथमिक विद्यालय अशोकपुर में कराने की व्यवस्था की गई है। इसी तरह अखनपुर स्थित प्राथमिक विद्यालय को भी बंद कर वहां के बच्चों को सतहा पुरवा के प्राथमिक विद्यालय में शिफ्ट किया गया है।
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तटबंधों पर बढ़ा दबाव, संवेदनशील स्थलों पर निगरानी
दुबौलिया। सरयू के बढ़ते जलस्तर से तटबंधों पर भी दबाव बढ़ गया है। उमरिया रिंग बांध पर तेज दबाव बना हुआ है। कटरिया-चांदपुर तटबंध पर खजांचीपुर से खलवा गांव तक दबाव बरकरार है। कटरिया गांव के सामने ठोकर नंबर एक पर भी दबाव बढ़ने की सूचना है। बाढ़ खंड की ओर से संवेदनशील स्थलों की निगरानी की जा रही है और कटानरोधी कार्य कराए जा रहे हैं। सुविका बाबू और टेढ़वा गांव के ग्रामीण पहले से ही बाढ़ से प्रभावित हैं। इसके अलावा सतहा, बलुईया, भुवरिया, जेठूपुरवा, खिलाड़ीपुरवा, विशुनदासपुर अनुसूचित बस्ती, बरदिया लोहार, श्रीरामपुरवा, अखनपुर और पूरे मोतीराम के संपर्क मार्गों पर पानी पहुंच गया है। सरयू की दो धाराओं के बीच बसे देवरा गंगबरार और कुर्मियाना गांव भी प्रभावित हैं। बाढ़ चौकियां सक्रिय कर दी गई हैं। सुविका बाबू गांव के रामनाथ, राजबाबू और जीतमल समेत ग्रामीणों ने रात के समय बिजली कटौती बंद कराने की मांग की है। उनका कहना है कि बाढ़ के बीच रात में अंधेरा होने से खतरा और बढ़ जाता है।
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तटीय गांवों में घुसा बाढ़ का पानी, कई गांवों का संपर्क प्रभावित
विक्रमजोत। सरयू के जलस्तर में बढ़ोतरी से विक्रमजोत क्षेत्र के तटीय गांवों में भी जलभराव की स्थिति बन गई है। पकड़ी संग्राम, अर्जुनपुर, शम्भूपुर, कल्याणपुर, चांदपुर, कन्हईपुर, खेमराजपुर, लकड़ी पांडेय और लकड़ी दूबे गांवों में पानी पहुंच गया है। मुख्य रास्तों और संपर्क मार्गों पर जलभराव होने से आवागमन प्रभावित है। कर्मचारियों के अनुसार सरयू का जलस्तर रुक-रुककर बढ़ रहा है। अपस्ट्रीम में सरयू में मिलने वाली नदियों का पानी फिलहाल स्थिर बताया जा रहा है। वहीं, बाराबंकी स्थित एल्गिन ब्रिज पर नदी के जलस्तर में कमी के संकेत मिले हैं। बढ़ते जलस्तर के कारण सरयू की धारा एलबी और बीडी तटबंधों से सटकर बह रही है। बाढ़ खंड के कर्मचारी संवेदनशील स्थानों पर निगरानी के साथ मरम्मत कार्य में जुटे हैं।
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महुआपार कला समेत कई गांवों में कटान का खतरा, खेतों में भरा पानी
कुदरहा। सरयू का जलस्तर बढ़ने से सदर तहसील क्षेत्र के कलवारी-रामपुर तटबंध के दक्षिण बसे महुआपार कला, मईपुर, बैरारी एहतमाली और टेंगरिहा राजा समेत कई गांवों में बाढ़ और कटान का खतरा बढ़ गया है। नदी का पानी कई स्थानों पर आबादी के करीब पहुंच गया है। कुछ जगह खेतों में पानी भरने से धान और गन्ने समेत अन्य फसलें डूबने लगी हैं। कटान के कारण ग्रामीणों में दहशत है। कई परिवार घरों से टीन-शेड और जरूरी सामान सुरक्षित स्थान पर ले जाने की तैयारी कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जलस्तर में बढ़ोतरी जारी रही तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
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बोले बाढ़ पीड़ित
बाढ़ में काफी परेशानी होती है। बच्चों को स्कूल आने-जाने में दिक्कत होती है और विषैले जीव-जंतुओं का डर बना रहता है। पानी हटने के बाद कटान का खतरा भी रहता है। गांव को बाढ़ से सुरक्षित करने के लिए रिंग बांध का निर्माण कराया जाना चाहिए।
-पूनम, अशोकपुर
बाढ़ के दौरान करीब चार महीने जिंदगी गुजारना काफी मुश्किल होता है। फसलें खराब हो जाती हैं, जबकि यही हमारी जीविका का मुख्य साधन हैं। पशुओं के चारे का भी संकट हो जाता है। सरकार को बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान पर ध्यान देना चाहिए।
-सुबाष, बलुईया
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ग्राम पंचायत माझा अशोकपुर तटबंध विहीन है। हर साल बाढ़ के कहर से लोगों की कमर टूट जाती है। अगर रिंग बांध का निर्माण हो जाए तो माझा के लोगों को काफी राहत मिल सकती है। यहां के लिए सरयू की बाढ़ अभिशाप बन गई है।
-जयराम, बलुईया
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बाढ़ हर साल आती है, लेकिन इसका स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है। बाढ़ के समय नाव ही आने-जाने का सहारा होती है। घरों में कैद होकर रहना पड़ता है। चूल्हा-चौका प्रभावित होने के साथ रहन-सहन भी अस्त-व्यस्त हो जाता है।
-सत्यनारायण, अशोकपुर
कोट
तटबंधों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। बाढ़ चौकियां अलर्ट पर हैं। जहां कटान का खतरा है, वहां मिट्टी डाली जा रही है। कटानरोधी कार्य भी कराए जा रहे हैं।
-दिनेश कुमार, एक्सईएन, बाढ़ खंड, बस्ती