सच्चिदानंद केस: पीड़िता की तबियत खराब होने से नहीं हो सकी गवाही
- न्यायालय ने 19 मार्च तय की गवाही की अगली तारीख
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। साध्वियों के यौन शोषण व सामूहिक दुष्कर्म के आरोपी कथित बाबा सच्चिदानंद पर दर्ज दो मामलों में बृहस्पतिवार को पीड़िता का न्यायालय में बयान दर्ज कराया जाना था। मगर सोमवार को फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश विजय कुमार कटियार की अदालत में पीड़िता की तरफ से मोहलत का प्रार्थनापत्र दिया गया। कहा गया कि उसकी तबीयत ठीक नहीं है,इसलिए गवाही दर्ज कराने के लिए न्यायालय में उपस्थित होने में अस्मर्थ है। ऐसे में न्यायालय ने गवाही के लिए 19 मार्च की तारीख तय की है। आरोपी बाबा के विरुद्ध स्थानीय कोतवाली में सामूहिक दुष्कर्म, बंधक बनाने, भगोड़ा होने सहित अन्य धाराओं में कुल चार मुकदमें दर्ज हैं। सभी मुकदमों में आरोप तय करने के बाद अदालत ने साक्ष्य के लिए दो पत्रावली में 11 व 12 मार्च को पीड़िता का बयान दर्ज कराया गया था। शेष दो में 14 मार्च की तिथि नियत की थी।
बता दें कि दिसम्बर 2017 में यौन शोषण का मामला तब प्रकाश में आया था, जब आश्रम से कुछ युवतियों को धक्के मारकर निकाल देने का आरोप लगाया। तत्कालीन एसपी संकल्प शर्मा के निर्देश पर सच्चिदानंद के अलावा उसके तीन शिष्यों परमचेतानंद, विश्वासानंद, ज्ञान वैराग्यानंद तथा दो मुख्य सेविकाओं पर 2009 से लगातार यौन शोषण व गैंगरेप का केस दर्ज किया गया। बाद में झारखंड की ही एक अन्य पीड़िता ने इन्हीं आरोपों में एक और केस कराया। पीड़ित महिलाओं का आरोप है कि सत्संग व प्रवचन के नाम पर महिलाओं और कम उम्र की लड़कियों को आश्रम में बुलाया जाता था। उनमें से पसंद की लड़कियों को साध्वी का दर्जा देकर आश्रम में रख लिया जाता था। उन्हें अनुष्ठान के जरिए विशेष कृपा दिलाने का दिलासा देते थे। उनका विश्वास जीतने के बाद दिल्ली स्थित आश्रम के मुख्यालय अथवा यहां के कथित बाबा व चेलों के निर्देश पर उन्हें अलग-अलग शहरों में प्रवचन- सत्संग के बहाने भेजकर उनका यौन शोषण किया जाता था। इन मामलों में सच्चिदानंद व अन्य सहयोगियों पर दर्ज चार केस में ट्रायल चल रहा है।
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