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Basti News: शासन का डंडा चलते ही बदल गई पुलिस-प्रशासन की चाल

Wed, 22 Nov 2023 12:54 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
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शासन का डंडा चलते ही बदल गई पुलिस-प्रशासन की चाल
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घनश्याम शुक्ला के निलंबन के बाद पुलिस की छह टीमें गिरफ्तारी के लिए रवाना
चार दिन से सुर्खियों में छाए नायब तहसील प्रकरण में आया नया मोड़
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। चार दिन से सुर्खियों में छाए नायब तहसीलदार प्रकरण ने मंगलवार को नया मोड़ ले लिया। महिला अधिकारी के साथ हुई घटना को शासन के संज्ञान में लेते ही मानो पुलिस को पंख लग गए हों। शासन का रुख देखते हुए न्यायालय से गैर जमानती वारंट जारी कराने के साथ गिरफ्तारी के लिए छह टीमों को रवाना कर दिया गया। एएसपी दीपेंद्र नाथ चौधरी ने बताया कि अगर आरोपी गिरफ्तार नहीं हो पाता है तो उसके खिलाफ कुर्की की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।
इससे पहले सोमवार को डीएम स्तर से विशाखा कमेटी की सिफारिशों के आधार पर गठित तीन महिला अधिकारियों की जांच कमेटी ने रिपोर्ट सौंप दिया था। रिपोर्ट में पूरे प्रकरण का अभियोग पंजीकृत कर विवेचना करने की सिफारिश की गई थी। कहा गया था कि पीड़िता महिला अधिकारी के आवास पर उस वक्त तीसरे व्यक्ति की मौजूदगी की बात सामने आ रही है। ऐसे में वह व्यक्ति कौन था?, पीड़िता को चोटें कैसे आईं, नायब तहसीलदार को पीड़िता के फोन से धमकी किसने दी आदि बिंदुओं पर गहन विवेचना की संस्तुति भी रिपोर्ट में की गई है। डीएम ने यह रिपोर्ट सोमवार को ही मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, प्रमुख सचिव राजस्व और राजस्व परिषद के आयुक्त एवं सचिव को भेज दिया था।
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प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए राजस्व परिषद ने रिपोर्ट को तत्काल संज्ञान में लेते हुए आरोपी नायब तहसीलदार घनश्याम शुक्ल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। साथ ही उन्हें कमिश्नर कानपुर कार्यालय से संबद्ध करते हुए लखनऊ की कमिश्नर को जांच अधिकारी नामित कर दिया है। माना जा रहा है कि पुलिस 24 घंटे के भीतर ही आरोपी घनश्याम शुक्ल को गिरफ्त में ले लेगी।
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शुरुआती रुख से होने लगी थी रफा-दफा की चर्चा
कचहरी में मंगलवार को भी इस प्रकरण की जगह-जगह चर्चा होती रही। लोगों का कहना था कि पूरा केस बलरामपुर के तीसरे व्यक्ति की तरफ झुक गया है। कई लोग तर्क भी देने लगे कि 11-12 नवंबर की रात हुई घटना के बारे में पुलिस को 16 नवंबर को तब जानकारी हुई, जब पीड़िता महिला अधिकारी ने तहरीर देकर मेडिकल और न्यायालय में बयान कराने का निवेदन किया। आरोप है कि केस दर्ज कर तफ्तीश करने की जगह पूरा तंत्र मामले को दबाने में जुट गया। पहले तो पीड़िता को मनाने की कोशिश हुई। तीन महिला अधिकारियों की जांच कमेटी गठन कर 24 घंटे के भीतर जवाब तलब किया। रिपोर्ट के अनुसार 17 नवंबर को ही कमेटी ने अपनी रिपोर्ट डीएम को सौंप दी थी। यह अलग बात है कि 20 नवंबर तक अधिकारी जांच पूरी न होने की बात करते रहे। इस बीच पुलिस भी केस में ज्यादा हाथ-पांव मारते नहीं दिखी। मंगलवार को जब शासन को भेजी गई रिपोर्ट सामने आई तो भी कई लोगों को लगा कि आरोपी को राहत मिल सकती है। मगर, मंगलवार को पूरा माहौल बदल गया।
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पुलिस के सामने हकीकत उजागर करने की चुनौती
शासन की कार्रवाई के बाद अब गेंद पुलिस के पाले में आ चुकी है। पुलिस के सामने इस हाई प्रोफाइल मामले की हकीकत सामने लाने की चुनौती है। इस केस में कई तथ्य ऐसे सामने आ सकते हैं, जिसे आसानी से उजागर करना उसके लिए आसान नहीं होगा। माना जा रहा है कि यह केस पुलिस के लिए अग्नि-परीक्षा से कम नहीं है। दो राजस्व अधिकारियों से जुड़े मामले में शासन-प्रशासन के अलावा सियासी दखलंदाजी से भी इन्कार नहीं किया जा सकता।
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जांच कमेटी को भी खटक रहा तीसरा शख्स
इस हाई प्रोफाइल केस में बलरामपुर के जिस तीसरे व्यक्ति की शुरू से चर्चा है, उसके बारे में महिला अधिकारी का जिक्र न करना भी जांच टीम को खटक रहा है। आरोपी घनश्याम शुक्ला ने अपने बयान में तीसरे व्यक्ति को फोन पर धमकी देने, अपशब्द कहने और महिला अधिकारी के घर से निकलकर भागने का जिक्र किया है। मगर,पीड़िता ने अपने बयान में सिर्फ अपने और आरोपी के वहां मौजूद होने की बात कही है। हालांकि कमेटी की जांच रिपोर्ट में तीसरे व्यक्ति के होने और उसकी पहचान करने के लिए अभियोग पंजीकृत करने का सुझाव दिया है।
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