बस्ती। सरयू नदी धीरे-धीरे बढ़ने के बाद शनिवार से फिर स्थिर हो गई। जलस्तर में लगातार गिरावट के चलते गांवों से पानी निकल गया है। अब लोगों की दिनचर्या भी पटरी पर लौटने लगी है। पानी नदी में चले जाने से खतरा टल गया है। हालांकि, नदी किनारे खेत में कटान अभी जारी है और सुविका बाबू गांव सरयू नदी के कहर से उबर नहीं पाया है।
दुबौलिया संवाद के अनुसार, आधी रात से सरयू का जलस्तर स्थिर बताया जा रहा। माझा क्षेत्र के लोगों की दिनचर्या तेजी से बदल रही है। संवेदनशील तटबंधों पर भी तेजी से दबाव कम हो रहा है। अभी जलस्तर खतरे के निशान से काफी नीचे है। केंद्रीय जल आयोग अयोध्या कार्यालय के अनुसार शाम पांच बजे जलस्तर 92.13 पर दर्ज किया गया जो खतरे के निशान 92.73 से 60 सेंटीमीटर नीचे है। हालांकि, बाढ़ के चलते बर्बाद फसल देखकर किसान चिंतित हैं। पशुओं के चारा को लेकर भी संकट है।
कटान की आशंका से ग्रामीणों की बढ़ी चिंता
विक्रमजोत। सरयू नदी का जलस्तर पिछले 24 घंटे में तीन सेंटीमीटर घटा है। इसके बावजूद बाढ़ प्रभावित गांवों में कटान का खतरा बना हुआ है। बीडी तटबंध के अंदर बसे गांवों के ग्रामीण नदी के घटते जलस्तर के बीच कटान बढ़ने की आशंका से चिंतित हैं। वहीं, बाढ़ का पानी उतरने के बाद जनजीवन धीरे-धीरे सामान्य होने लगा है।
बीडी तटबंध के अंदर बसे शंभूपुर, पकड़ी संग्राम, लकड़ी पांडेय, लकड़ी दूबे और अर्जुनपुर समेत कई गांवों के ग्रामीण कटान को लेकर आशंकित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ के दौरान ही नदी ने कई स्थानों पर कटान शुरू कर दिया था। अब जलस्तर में गिरावट के साथ कटान बढ़ने की आशंका सता रही है। ऐसे में नदी के किनारे बसे लोगों को अपनी जमीन और फसलों के नुकसान का डर बना हुआ है।
उधर, बाढ़ के बाद मवेशियों के चारे की समस्या भी बरकरार है। ग्रामीणों को पशुओं के लिए चारा जुटाने के लिए दूर-दराज तक भटकना पड़ रहा है। वहीं, पानी उतरने के बाद खेतों में सड़ रही फसलों और वनस्पतियों से दुर्गंध उठ रही है। इससे संक्रामक बीमारियों और मच्छरों के प्रकोप का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों को अब कटान के साथ-साथ बीमारी फैलने की आशंका भी सता रही है।
संवेदनशील तटबंधों की निगरानी अभी चल रही है। इसके लिए टीम लगी है। अब खतरा नहीं है। -दिनेश कुमार, एक्सईएन, बाढ़ खंड बस्ती ।