नदी का जलस्तर घटने के साथ कटान भी बंद, ग्रामीणों को मिला सुकून
संवाद न्यूज एजेंसी
गायघाट (बस्ती)। साढ़े पांच करोड़ रुपये खर्च कर सरयू नदी की धारा मोड़ने के बाद भी मईपुर और मदरहवा में कटान थमी नहीं। अलबत्ता नदी का रुख बदलने के बजाय गांवों की ओर हो गया। जबकि ड्रेजिंग कार्य के बाद नदी की धारा गांवों से दूर होने का दावा किया गया था। फिलहाल कटान बंद होने से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है।
सदर तहसील के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र मदरहवा और मईपुर गांव को कटान से बचाने के लिए मार्च 2024 से चार माह तक ड्रेजिंग (नदी की धारा मोड़ने का कार्य) कार्य किया गया था। इस पर साढ़े पांच करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। सिंचाई विभाग के बैराज यांत्रिक अनुरक्षण केंद्र वाराणसी की टीम ने इस कार्य को कराया था। करीब साढ़े चार किमी की दूरी तक नदी में चैनल बनाकर ड्रेजिंग कार्य हुआ था।
दावा किया गया था इस कार्य के बाद नदी की धारा गांव से दूर हो जाएगी। इससे ग्रामीणों को कटान की समस्या नहीं झेलनी पड़ेगी। मगर, परिणाम इसके ठीक विपरीत देखने को मिला। जैसे ही सरयू का जलस्तर बढ़ा ड्रेजिंग वाले क्षेत्र में नदी का दबाव तेज हो गया। फसल से लहलहाती सैकड़ों बीघा कृषि योग्य भूमि नदी मे विलीन हो गई। नदी मईपुर और मदरहवा गांव की ओर रुख कर गई।
रामभवन पासवान, मनीष पासवान के घर नदी की धारा में बह चुके हैं। कटान की डर से गांव में भगदड़ मची है। सुरेंद्र पासवान, गंगाराम, भोले समेत एक दर्जन परिवार अपने पक्के मकान को तोड़कर ईंट और गृहस्थी के सामान अन्यत्र लेकर चले गए। करीब 150 लोगों को घर-बार छोड़कर शरणार्थी बनना पड़ा। ग्रामीणों का कहना है कि महुआपार कला गांव के पास धारा मोड़ने के लिए ड्रेजिंग का कार्य किया गया था। जबकि धारा और सोती के बीच खाली जगह पर कोई कार्य नहीं हुआ था। यहां पानी का दबाव बनते ही नदी की धारा सीधे गांव की तरफ मुड़ गई। कटान इतनी तेजी से होने लगी कि नदी गांव के अस्तित्व को खत्म करने पर आमादा हो गई। वर्तमान में नदी मईपुर में आज्ञाराम के घर और मिनी सचिवालय से सट कर बह रही है।
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कटान बंद होने मिली राहत
सरयू नदी का जलस्तर घटने के साथ कटान बंद होने से मईपुर और मदरहवा गांव के लोगों को काफी राहत मिली है। कटान से प्रभावित लगभग 150 से अधिक लोग घर छोड़कर गुजर-बसर कर रहे हैं। ग्रामीण गांव की तबाही का कारण ड्रेजिंग कार्य और अंधाधुंध अवैध बालू खनन को बता रहे हैं।