बस्ती। आलू की उपज को बेहतर व गुणवत्तापरक बनाने की सरकारी योजना अभी परवान नहीं चढ़ पाई है, मगर आलू किसानों की बेहतरी के लिए शासन लगातार प्रयासरत है। इसका न्यूनतम मूल्य तय करने के लिए शासन ने बाजार हस्तक्षेप योजना में केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा है। प्रस्ताव के आधार पर 665 रुपये प्रति क्विंटल आलू का न्यूनतम मूल्य तय किया गया है।
आलू की पैदावार पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर सहित कई जिलों में होती है। अत्यधिक पैदावार को देखते हुए शासन ने पिछले दिनों इस क्षेत्र के किसानों को सुविधा देने के लिए खरीद योजना में शामिल किया था। यहां आलू की खपत के लिए संसाधन को विस्तारित करने की योजना बनाते हुए अनुदान की घोषणा की है। यह सब अभी चल ही रहा था कि शनिवार को शासन ने आलू किसानों के लिए एक और फैसला लिया है। आलू की न्यूनतम दर तय करने के लिए कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में आलू की न्यूनतम दर 665 रुपये तय करते हुए केंद्र सरकार को बाजार हस्तक्षेप योजना में प्रस्ताव भेज दिया है। हालांकि, अभी प्रस्ताव पर केंद्र सरकार की मुहर लगनी है लेकिन उसके बाद यह योजना अपने सूबे में लागू हो जाएगी। प्रभारी उप निदेशक आलू, संयुक्त निदेशक औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र डॉ. आरके तोमर ने बताया कि राज्य सरकार ने बाजार हस्तक्षेप योजना के प्रस्ताव पर अपनी सहमति देते हुए केंद्र की सहमति के लिए प्रस्ताव भेजा है। सप्ताह भीतर प्रस्ताव पर निर्णय भी हो जाएगा।