आफत बनी बेमौसम बारिश, फसलें चौपट
बस्ती। मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है। आफत बनी बारिश किसानों को चिंता में डाल दिया है। एक दिन पहले हुई बारिश को कृषि विशेषज्ञ फायदेमंद बता रहे थे, लेकिन मंगलवार को वैज्ञानिकों ने इसे आफत करार देते हुए बताया कि और बारिश हुई तो फसलें तबाह हो जाएंगी।
सोमवार की रात तेज हवा के साथ हुई झमाझम बारिश ने सबकी चिंता बढ़ा दी है। खेतों में पानी लग हुआ है। अगेती फसलें बर्बाद होने के कागार पर पहुुंच गई हैं। प्रगतिशील किसान परमानंद सिंह ने बताया कि शनिवार को हुई बारिश से फसलों को मिला-जुला फायदा हुआ था, लेकिन सोमवार की बारिश ने काफी नुकसान पहुंचाया है। आलू एवं अगेती सरसों पक तैयार हो चुकी थी। किसान चार-पांच दिनों में इसकी कटाई करने की सोच रहे थे कि बारिश ने पूरा खेल ही बिगाड़ दिया। किसान राममूर्ति मिश्रा ने बताया कि पूरी फसल जमींदोज हो चुकी है। फसल जमीन पर गिरने से उत्पादन और उत्पादकता दोनों प्रभावित होगी। कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आरवी सिंह ने बताया कि नमी बढ़ने से कीटों का प्रकोप बढ़ेगा। किसान फसलों की नियमित निगरानी करें और रोग-व्याधि की आशंका में विशेषज्ञों की सलाह जरूर लें।
सब्जियों को ज्यादा नुकसान
जायद सीजन के लिए किसान आजकल लौकी, नेनुवा, तरोई, कद्दू, खीरा, भिंडी, तरबूज, खरबूज, खीरा, ककड़ी आदि की पौध लगा रहे हैं। बारिश अधिक होने के कारण पौध सड़ सकते हैं। फल उत्कृष्टता केंद्र प्रभारी अधिकारी व वैज्ञानिक सुरेश कुमार ने बताया कि जायद सीजन के लिए किसानों को करीब 25 हजार से अधिक पौध तैयार कर वितरित किया गया है। बारिश से जायद सीजन की सब्जियों की खेती अधिक प्रभावित होगी।
दिनभर ठप रही डमरुआ की बिजली आपूर्ति
बस्ती। विद्युत उपखंड अमहट के तहत आने वाले डमरुआ उपकेंद्र की 33 केवी लाइन मंगलवार सुबह से ही ब्रेकडाउन में रही। खेतों में पानी भरा होने से शाम छह बजे फाल्ट खोजा जा सका।
सोमवार रात हुई बारिश के कारण डमरुआ उपकेंद्र की 33 केवी लाइन ब्रेकडाउन हो गई। इससे 26 सौ घरों को मंगलवार पूरा दिन बिजली नहीं मिली। बिजली न होने से उपभोक्ताओं के राजमर्रा कार्य प्रभावित रहे और घरों में पानी नहीं आया। गिदही 220 केवी ट्रांसमिशन से डमरुआ उपकेंद्र को बिजली आपूर्ति दी जाती है। करीब 22 किलोमीटर लंबी लाइन का मंगलवार को आठ इंसुलेटर पंचर हो गया। जिसे ढूंढने में बिजलीकर्मियों को पूरा दिन लग गया। उपखंड अधिकारी मनोज यादव ने बताया कि लाइन ज्यादा लंबी है और खेतों से होकर गुजरती है। बारिश के कारण खेतों में पानी भरा हुआ है। जिससे खंभों पर चढ़ना काफी मुश्किल हो रहा था। बताया कि करमा देवी महाविद्यालय के पास नदी किनारे आठ इंसुलेटर नमी के कारण पंचर हो गए थे। जिसे बदलकर आपूर्ति बहाल कर दी गई है।