संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। पुलिस का संदेह सही साबित हुआ। नौ जनवरी को बंद पड़े स्कूल में जलाया गया शव जामवंत का नहीं था। डीएनए रिपोर्ट में स्पष्ट हो गया कि वह शव किसी पुरुष का तो था, मगर जामवंत या उसके परिवार से उसका दूर-दूर तक रिश्ता नहीं निकला। यह सच्चाई सामने आने के बाद पुलिस का संदेह जामवंत के लापता मित्र अंगद की तरफ बढ़ने लगा है। अब पुलिस के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि कहीं जलाया गया शव अंगद का तो नहीं था। आशंका यह भी है कि कहीं दोनों ने मिलकर यह षड्यंत्र न किया हो। कहीं से कोई दूसरा शव लाकर जलाकर दोनों एक साथ भाग गए हों। सीओ सत्येंद्र भूषण त्रिपाठी ने बताया कि पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। सभी पहलुओं पर छानबीन चल रही है। उम्मीद है कि सच्चाई जल्द सामने आ जाएगी।
नौ जनवरी को धौरहरा गांव के जामवंत शर्मा के बंद पड़े स्कूल में 85 फीसदी जला हुआ शव मिला था। पास में चाभी का गुच्छा और चप्पल भी मिला था। इसे देखकर जामवंत के परिवार के लोगों ने शव की पहचान की थी, मगर कोई अन्य साक्ष्य न मिलने की वजह से पुलिस यह मानने को तैयार नहीं थी कि वह शव जामवंत का ही है। पूछताछ में पुलिस को जब से यह पता चला कि जामवंत काफी शातिर किस्म का इंसान है और हत्या के केस में आरोपी है जिसमें उसकी सजा होने वाली है तो संदेह और भी गहरा गया।
पुलिस की तफ्तीश इस थ्योरी पर आधारित हो गई कि जामवंत न्यायालय की सजा से बचने के लिए षड्यंत्र कर भाग गया है।