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Basti News: जल्द बदलेगी भद्रेश्वरनाथ मंदिर की तस्वीर

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लिंक रोड पर बन रहा अंडरपास।
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बस्ती। शहर से आठ किमी की दूरी पर स्थित बाबा भद्रेश्वरनाथ धाम अध्यात्म के साथ विकास में भी ख्याति बटोरने लगा है। यहां विकास की हलचल तेज हो गई है। बस्ती रिंग रोड परियोजना इस पौराणिक स्थल के लिए नई सौगात लेकर पहुंची है। अब यह धाम फोरलेन सड़क से सीधे जुड़ेगा। मंदिर से चौतरफा आवागमन की रफ्तार तेज हो जाएगी। मंदिर के बगल से गुजरने वाली कुआनो नदी पर सौ मीटर लंबा और 22 मीटर चौड़ा नया पुल भी बन रहा है। रिंगरोड को भद्रेश्वरनाथ से जोड़ने के लिए मंदिर के मुख्य सड़क पर अंडरपास का निर्माण हो चुका है। भद्रेश्वरनाथ शिवालय पर श्रावण मास में श्रद्धालुओं की भीड़ अधिक रहती है। श्रावण तेरस के दिन यहां लाखों श्रद्धालुओं का मेला लगता है। अयोध्या सरयू तट से भद्रेश्वरनाथ तक पांच लाख से अधिक श्रद्धालु कांवड़ लेकर पहुंचते हैं। इधर डेढ़ दशक से इस पर्व की ख्याति इतनी बढ़ी कि श्रद्धालुओं की अपार भीड़ भद्रेश्वरनाथ से अयोध्या तक कांवड़ लेकर पैदल चलती है। इस पर्व के चलते चार दिनों तक बस्ती-अयोध्या हाईवे बंद रहता है। शासन स्तर से श्रद्धालुओं पर पुष्पवर्षा के लिए हेलीकॉप्टर से कराई जाती है। मगर भीड़ के हिसाब से आवागमन और मंदिर परिसर में ठहरने की व्यवस्था न होने से हर साल यह कमी श्रद्धालु और प्रशासन सभी को अखरने लगती है।
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श्रद्धालु अमहट घाट से लेकर भद्रेश्वरनाथ तक सड़क के किनारे जमीन या दुकानों और मकानों के फर्श पर अपना डेरा जमाते हैं। इधर विकास की हलचल शुरू हुई तो यह समस्या खत्म की उम्मीद बढ़ गई है। इस बार श्रावण मास में तो व्यवस्था पहले जैसी ही रहेगी लेकिन, अगले साल इसमें काफी परिवर्तन होने की संभावना है। बस्ती रिंग रोड परियोजना इसकी मुख्य वजह बन रही है। बस्ती से अयोध्या हाईवे पर गोटवा के पास से बन रही रिंग रोड की फोरलेन सड़क भद्रेश्वरनाथ गांव के बाहर से गुजर रही है। इसके लिए मंदिर से पांच सौ मीटर की दूरी पर कुआनो नदी के ऊपर 22 मीटर चौड़ा और 100 मीटर लंबा पुल का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए पाइलिंग और बेस तैयार करने का कार्य शुरू कर दिया गया है। वहीं फोरलेन सड़क को गांव से बाहर निकालने के लिए भद्रेश्वरनाथ मुख्य मार्ग पर अंडरपास बनकर तैयार हो गया है। रिंग बनने से भद्रेश्वरनाथ मंदिर से निकलकर लोग लुंबिनी-दुद्धी एवं बस्ती-अयोध्या हाईवे, बस्ती-महुली मार्ग तक सीधे पहुंच सकते हैं। इससे मंदिर परिसर से बाहर निकलने के लिए श्रद्धालुओं के पास कई विकल्प हो जाएंगे। अभी तक श्रद्धालुओं को केवल डारीडीहा-भद्रेश्वरनाथ मार्ग की चार मीटर चौड़ी सड़क से ही आना-जाना पड़ता है। इस वजह से कांवड़ उत्सव में जाम लग जाता है।
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