बस्ती। विकास प्राधिकरण (बीडीए) के कदम नए परिधि की ओर नहीं बढ़ पा रहे हैं। पूरा साल बीत गया। चरणबद्ध ढंग से कसरत होते गए, मगर महायोजना 2031 को स्वीकृति नहीं मिली। ऐसे में शहर के विकास की अभी राह दूर है। चौथी बार भेजी गई महायोजना 2031 की फाइल को स्वीकृति नहीं मिली है। यह शासन स्तर पर लंबित है। इससे बीडीए अपने पुराने दायरे में ही सिमट कर रह गया है।
जिले में वर्ष 2016 में बीडीए की स्थापना हुई थी। तब नगर पालिका समेत 69 गांवों का मास्टर प्लान तैयार किया गया था। इसमें बीडीए का कुल क्षेत्रफल महज 51 वर्ग किमी रहा। यह मास्टर प्लान महायोजना 2021 में लागू हो सका। क्योंकि बीडीए कार्यालय की स्थापना वर्ष 2018 में हुई और महायोजना लागू होने में तीन साल अतिरिक्त लग गए। वर्ष 2013 में महायोजना 2031 का खाका तैयार किया गया। पहली बार अप्रैल 2023 में नए मास्टर प्लान के साथ यह स्वीकृति के लिए शासन में भेजा गया। मगर, आपत्तियों के साथ यह लौटा दिया गया।
बीडीए तीन बार संशोधन के साथ महायोजना 2031 की फाइल शासन में भेजी और तीनों बार इसे लौटाया गया। शासन की ओर से निर्देश दिए गए कि नए महायोजना में जमीनों की प्रकृति, नक्शा और डूब क्षेत्र बिल्कुल स्पष्ट होने चाहिए, ताकि नए मास्टर प्लान में मानचित्रों को पास करते समय कोई त्रुटि न होने पाए। यहां तक कहा गया कि राजस्व अभिलेख के अनुसार सरकारी, गैर सरकारी जमीन, तालाब, पोखरे एवं नजूल की जमीनों को बीडीए के मानचित्र में गाटा संख्या, राजस्व गांव के विवरण के साथ अंकन भी किया जाए।
बहरहाल बीडीए ने विभिन्न विभागों से समन्वय स्थापित कर इन बिंदुओं पर डाटा तैयार कर नए मास्टर प्लान में संशोधन किया। इसके बाद नवंबर 2023 के अंत में इन बिंदुओं पर संशोधित महायोजना 2031 की फाइल शासन में भेज दी गई है। उम्मीद थी चौथी बार प्रेषित फाइल को स्वीकृति मिल जाएगी। मगर एक महीने से अधिक का समय हो गया अभी महायोजना 2031 को स्वीकृति नहीं मिल सकी हैं।
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तीन गुना बढ़ा बीडीए का दायरा
नए मास्टर प्लान में बीडीए का दायरा बढ़कर तीन गुना हो गया है। महायोजना 2021 के हिसाब से बीडीए का क्षेत्रफल 51 वर्ग किमी था। अब महायोजना 2031 में क्षेत्रफल बढ़कर 151.50 वर्ग किमी हो गया है। पहले नगर पालिका समेत 69 गांव थे तो नए मास्टर प्लान में नगर पालिका सहित 217 गांव बीडीए के दायरे में लाए गए हैं। स्वीकृति न मिलने की वजह से नए क्षेत्र में बीडीए का प्रभावी दखल नहीं हो पा रहा है।
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प्रस्तावित क्षेत्र में हो रहा अनियमित नियोजन
बीडीए के प्रस्तावित 151.50 वर्ग किमी क्षेत्रफल में अनियमित नियोजन जारी है। निर्माण क्षेत्र बढ़ता जा रहा है। दस किमी के दायरे में पड़ने वाले गांव के आसपास शहरी दर जमीन बिक रही है। यहां बिना नक्शे की लोग आवासीय एवं कामर्शियल दोनों तरह का निर्माण कर रहे हैं। बड़े- बड़े हॉस्पिटल तक खोल लिए जा रहे हैं। इसके अलावा नजूल एवं सरकारी जमीनों पर भी निर्माण हो रहा है। बीडीए का दखल केवल शहर के दो से तीन किमी के इर्द-गिर्द ही हो पा रहा है। ऐसे में जब तक महायोजना 2031 लागू होगा तब तक संरचना काफी कुछ बिगड़ जाएगी।
नए मास्टर प्लान में ग्रीन लैंड का मानक हुआ कम
महायोजना 2031 के मास्टर प्लान में हाईवे के किनारे ग्रीन लैंड का मानक कम हुआ है। इसका फायदा सीधे काश्तकारों को मिलेगा। वर्तमान में लागू मास्टर प्लान के अनुसार बीडीए क्षेत्र में हाईवे की लगभग 75 मीटर चौड़ी जमीन के दोनाें किनारे से 87.5 मीटर छोड़कर ही निर्माण की अनुमति है। जिससे हाईवे के किनारे काश्तकार अपनी जमीनों में निर्माण नहीं कर पा रहे हैं। नए मास्टर प्लान में यह 50.5 मीटर घटाकर केवल 30 मीटर कर दिया गया है। लेकिन महायोजना 2031 को स्वीकृति न मिलने से यह मानक अभी लागू नहीं हो पा रहा है।
बीडीए के नए मानचित्र में ग्रीन जोन का भी विवरण
बीडीए के नए मास्टर प्लान में ग्रीन जोन का संपूर्ण विवरण दर्ज किया गया है। मानचित्र से लेकर बुकलेट तक में 151 वर्ग किलोमीटर की परिधि में आने वाले ग्रीन जोन में चिह्नित जमीनों का राजस्व अभिलेख के अनुसार गाटा संख्या और रकबा सहित विवरण दर्शाया गया है। वहीं मानचित्र में इसका कलर भी अलग रखा गया है। ताकि मानचित्रों के आवेदन के समय बीडीए इन जमीनों से मिलान कर सकें। इसमें बंजर, नजूल, चारागाह, पर्ती, गड़ही, ताल, पोखरा, चकमार्ग आदि प्रकृति की जमीनें शामिल की गई है।
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कोट
महायोजना 2031 की फाइल संशोधन के बाद शासन में प्रस्तुत कर दी गई है। स्वीकृति मिलने के बाद नया मास्टर प्लान लागू हो जाएगा। प्रस्तावित क्षेत्र की निगरानी की जाती है। ताकि अनियमित नियोजन न हो सकें।
-संदीप कुमार, एक्सईएन, बीडीए