संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। बाजार मिलावट से भरा है। दाल, तेल, आटा, मसाला, घी, पनीर आदि की शुद्धता पर संदेह है। शॉपिंग मॉल, दुकान हर जगह खाद्य पदार्थों की बिक्री में बड़ा खेल है। सुर्ख लाल मसाला हो या पीलापन बिखेरती हल्दी अथवा दाल इसमें प्रकृति के बजाय कृत्रिम रंगों की चमक है।
धंधेबाज मिलावट के खेल से काली मिर्च तक नहीं छोड़ रहे हैं। इसमें भी पपीते के बीज रंग करके मिक्स कर दिए जा रहे हैं। यदा-कदा खाद्य सुरक्षा विभाग के भरे गए नमूनों की रिपोर्ट खुद इन खाद्य पदार्थों को सेहत के लिए खतरनाक होने की पुष्टि करते हैं।
इधर खाद्य पदार्थों के नमूनों की हालिया रिपोर्ट में चौकाने वाली आई है। करीब 14 नमूने अधोमानक या असुरक्षित पाए गए हैं। इनसे जुड़े व्यापारियों को आरोपी मानते हुए यह प्रकरण न्यायालयों में पहुंचाना पड़ा है। यह स्थिति तब है जब खाद्य सुरक्षा टीम कभी- कभी ही जांच के लिए निकल पाती है।
एक माह में बमुश्किल 10 से 15 नमूने जिले भर से लिए जा रहे हैं। जबकि 30 लाख आबादी वाले इस जिले में एक नगर पालिका, 10 नगर पंचायत के अलावा एक दर्जन से अधिक बड़ी बाजार वाले कस्बे हैं। जानकारों की मानें तो मिलावटी खाद्य पदार्थों की बड़ी खेप ग्रामीण अंचल की बाजार में खपाई जा रही है। क्योंकि यहां विभागीय जांच या कार्रवाई का भय न के बराबर होता है। इसीलिए जब कभी ग्रामीण अंचल में टीम पहुंचती है तो बड़े पैमाने पर मिलावट वाले खाद्य पदार्थ बरामद होते हैं।
एक दिन पहले बुधवार को फूड कमिश्नर वीके पांडेय, अभिहित अधिकारी धर्मराज मिश्र व मंडलीय खाद्य सुरक्षा अधिकारी इंद्रेश कुशवाहा मय टीम बभनान के विजय नगर चौराहे पर पहुंचे। एक दुकान पर रंगी हुई मसूर दाल बेचने के लिए रखी हुई थी। टीम ने लेकर जांच के लिए भेज दिया।