बस्ती। जिले के कप्तानगंज ब्लॉक के ग्राम पंचायत पटखौली में विकास कार्यों में गड़बड़ी की पुष्टि हुई है। शिकायत की जांच पूरी होने के चार माह बाद भी अभी तक जिम्मेदार न तो रिकवरी करवा सके न ही कार्रवाई किए, इससे शिकायतकर्ता ने फिर से सवाल किया है।
बताया गया कि जांच अधिकारियों ने रिपोर्ट अक्तूबर 2025 में ही डीएम को रिपोर्ट सौंप दी थी, मगर अभी तक कार्रवाई में लेटलतीफी की जा रही है। बताया गया कि उस जांच रिपोर्ट के सापेक्ष कार्रवाई नहीं की गई। उप निदेशक कृषि अशोक कुमार गौतम की अध्यक्षता वाली टीम में सहायक अभियंता आरईडी व जिला लेखा परीक्षा अधिकारी सहकारी समितियों ने डीएम को भेजी रिपोर्ट में शिकायत, उसके सापेक्ष जांच कर आख्या दी गई है।
जांच आख्या में कहा कि गांव के विजय कुमार यादव निवासी सेमरा पोस्ट दुबौली दूबे ने शिकायत किया था कि ग्राम पंचायत पटखौली राजा में प्रधान और सचिव ने विकास कार्य में गड़बड़ी की है। इसपर डीएम ने तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की थी। जांच टीम ने कहा कि शिकायती प्रकरण से संबंधित अभिलेख एवं शिकायती बिंदुओं के संबंध में साक्ष्य सहित उत्तर की मांग सचिव व प्रधान से की गई, परंतु इन लोगों ने वांछित अभिलेख उपलब्ध नहीं कराया। अपना उत्तर भी प्रस्तुत नहीं किया। बार-बार लिखित रूप से अभिलेख मांगने के बाद सचिव व प्रधान का उत्तर अपर्याप्त है। इस पर जांच टीम ने अक्तूबर 2025 में ग्राम पंचायत पटखौली राजा पहुंच कर स्थलीय जांच किया था।
जांच के समय मनोज कुमार दुबे ग्राम प्रधान, उदितांशु शुक्ल सचिव, सतीश दुबे पंचायत सहायक, रामसरन ग्राम रोजगार सेवक एवं विजय कुमार यादव शिकायतकर्ता के साथ अन्य ग्रामवासी उपस्थित रहे। जांच समय ग्राम प्रधान एवं ग्राम सचिव ने लिखित उत्तर दिया, लेकिन कोई अभिलेख आदि उपलब्ध नहीं कराया। जांच के दौरान पता चला कि मनरेगा योजना के तहत सेमरा सरहन से दुबौली सरदह तक बंधा निर्माण 9.14 लाख रुपये स्वीकृत किया गया। 8.57 लाख रुपये का भुगतान हुआ। टीम ने जांच बाद बताया कि बंधे का निर्माण पूर्व में कराया गया लग रहा है।
प्रधान व सचिव ने काम होने का कोई अभिलेख नहीं उपलब्ध कराया। मरचोलिया सरहद से बंधा कार्य में 4.55 लाख रुपये का भुगतान किया गया। जांच में पता चला कि श्रमिकों की एक ग्रुप फोटो बार-बार भुगतान के लिए लगाया गया। मजदूरी को मजदूरों के खाते नहीं भेज कर स्वयं प्रधान के खाते में करा लिया। 15वें वित्त के नौ, पंचम वित्त के दो और राज्य वित्त के दो काम कराए गए हैं।
जांच टीम ने निष्कर्ष निकला कि प्रथम दृष्टया शिकायतकर्ता के शिकायत की पुष्टि होती है। टीम ने जांच रिपोर्ट डीएम के यहां सौंपी, मगर वह अभी तक पंचायतीराज विभाग तक नहीं पहुंची है।