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Basti News: सूना रहा हाईवे, ऑटो भी नहीं चले... दोपहर बाद बढ़ी चहल-पहल

Tue, 02 Jan 2024 11:17 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
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बस्ती। ट्रक, बस, टैक्सी आदि वाहनों के चालकों ने दूसरे दिन मंगलवार को भी हड़ताल जारी रखा। हाईवे सूना रहा। ट्रक और बस सड़कों पर दौड़ते हुए कम दिखे। निजी वाहनों से लोग आते-जाते रहे। पुलिस की सक्रियता से जाम या उपद्रव की स्थिति नहीं रही, लेकिन चालकों ने स्वत: वाहन चलाने से परहेज किया। शहर में ऑटो एवं अन्य टैक्सी वाहन संचालित होते नहीं पाए गए। रोडवेज बसों का संचालन प्रभावित रहा। दोपहर बाद ही इन वाहनों की चहल-पहल बढ़ सकी।
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सड़क सुरक्षा से संबंधित हिट एंड रन नए कानून का विरोध जारी है। चालकों के आंदोलन की स्थिति पहले दिन जैसी भले नहीं रही, लेकिन सड़कों पर कामर्शियल वाहन न के बराबर दिखे। हाईवे पर प्रशासन एवं पुलिस के अधिकारी दिन भर दौड़भाग करते नजर आए। जगह-जगह पुलिस मुस्तैद होने के कारण प्रदर्शन एवं चक्का की स्थिति नहीं बन सकी। फिर भी चालकों ने वाहनों को अपने गंतव्य एवं खाली जगहों पर खड़ा कर विरोध जारी रखा। इसकी सर्वाधिक मार यात्रियों को झेलनी पड़ी।
यात्रा के लिए बस, टैक्सी, ऑटो खोजने पर भी नहीं मिल रहे थे। शहर के रोडवेज, बड़ेवन, मूड़घाट, टोल प्लाजा पर यात्रियों को वाहनों के इंतजार में परेशान होते देखा गया। माल वाहक वाहन भी इक्का-दुक्का आते-जाते दिखाई पड़े। अलबत्ता दिन में एक बजे के बाद कुछ चालक अपने सवारी एवं माल वाहक को लेकर जरूर निकले। बस चालक मेहताब ने बताया कि आंदोलन का भरपूर समर्थन है। सरकार ने चालकों के हित में कानून नहीं बनाया है। रोजी-रोटी के लिए आधा दिन के बाद से निकलना मजबूरी बन गई। कुछ ऑटो भी दोपहर बाद सवारियों को ढोते हुए सड़कों पर देखे गए।
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सुबह एक-दूसरे पाॅली में निकली एक दर्जन बसें
रोडवेज डिपों की बसों का संचालन लगभग ठप जैसा रहा। सुबह डिपो की एक बस निकाली गई। इसके बाद चालक बस ले जाने को तैयार नहीं हुए जिससे डिपो परिसर में बसें खड़ी रह गई। दिन में एक बजे के बाद कुछ चालक तैयार हुए। तब जाकर बसों का संचलन रूक- रूक कर शुरू हुआ। शाम पांच बजे तक एक दर्जन बसों को डिपो से रवाना किया गया। एआरएम आयुष भटनागर के अनुसार दूसरे दिन डिपो की आमदनी को बड़ा झटका लगा है। रोडवेज और रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को देर तक भटकना पड़ा। निराश लोग अपने शुभचिंतकों को फोन कर गंतव्य तक पहुंचने के लिए मदद मांगनी पड़ी। दिल्ली से आए प्रकाश मोहन ने बताया कि दो घंटे से खड़े हैं। अब तक कोई भी वाहन बांसी रोड पर जाने को तैयार नहीं है। कुछ ऑटो इधर-उधर खड़े दिखाई पड़ रहे हैं, मगर चालक नहीं दिख रहे हैं। घर फोन करके गाड़ी मंगाना पड़ रही है।
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रोडवेज डिपो में आया मुख्यालय से पत्र



रोडवेज डिपो में हड़ताल के मद्देनजर परिवहन निगम मुख्यालय से उच्चाधिकारियों के पत्र आने लगे हैं। परिवहन आयुक्त ने निर्देश दिए है कि निगम के सभी आरएम और एआरएम बस यूनियन के पदाधिकारियों एवं चालकों से वार्ता कर समन्वय बनाएं। उन्हें समझाया जाए कि अभी सड़क दुर्घटना से संबंधित नया कानून लागू नहीं हुआ है। ऐसे में वाहनों का संचलन सुनिश्चित कराया जाए। क्षेत्रीय प्रबंधक ने निर्देश दिए हैं कि प्राइवेट चालकों की ओर से चक्का जाम किया जा रहा है। ऐसे में सभी एआरएम अपने जिले के डीएम, एसपी से संपर्क कर सुरक्षा के साथ बसों का संचालन कराए।
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यात्रियों को ट्रेन भी धोखा दे रही है। बाराबंकी रेल प्रखंड में निर्माण के चलते गोरखपुर-लखनऊ रूट की अधिकतर ट्रेनों का संचलन ठप है। गिनती की कुछ ट्रेनें मुंबई और दिल्ली से आ रही हैं। कोहरे की वजह से उनका भी शेड्यूल बिगड़ा हुआ है। इधर, चालकों ने हड़ताल शुरू कर दिया है। ऐसे में हर किसी की यात्रा कठिन हो गई है। रेल और सड़क दोनों तरफ की मार यात्रियों को झेलनी पड़ रही है।
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बाजार पर पड़ने लगा असर
हड़ताल का असर अब बाजार पर भी पड़ने लगा है। मंडी में सब्जियों की आवक कम हो गई है। अन्य सामग्रियों की भी आवक प्रभावित हुई है। इससे रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमत में उछाल आ सकता है। मंगलवार को कुछ सब्जियों के भाव बढ़े हुए थे। मटर 30 से 50 रुपये हो गया। लहसुन 250 से 300 रुपये किलो तक पहुंच गया। यदि यही हाल रहा तो आलू, प्याज के भी भाव चढ़ जाएंगे। सब्जी व्यवसायी हसन ने बताया कि यदि हड़ताल जारी रहा तो सब्जियों के भाव में एक-दो दिन बाद अच्छा खासा उछाल आएगा।
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गन्ना आपूर्ति नहीं मिली, अठदमा मिल बंद

रुधौली। चक्का जाम के चलते अठदमा चीनी मिल में गन्ने की कमी पड़ गई है। चक्का जाम के दूसरे दिन मंगलवार सुबह तीन बजे मिल नो केन में बंद करनी पड़ गई। गन्ना लदे वाहन न होने से मिल का यार्ड सूना पड़ा हुआ है। मिल के गन्ना प्रबंधक शैलेंद्र कुमार त्रिपाठी ने बताया कि ट्रैक्टर ट्राॅलियों व ट्रैक के सहारे मिल को गन्ने की आपूर्ति मिलती है। चक्का जाम होने के कारण गाड़ियां नहीं आ रही हैं। इससे मिल नो केन के चलते बंद करनी पड़ी। बताया कि प्रतिदिन करीब 32 हजार क्विंटल गन्ने की पेराई होती है। इसे दोबारा स्टार्ट करने में लाखों रुपये का खर्च उठाना पड़ेगा। संवाद

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कोअ
लखनऊ से बस्ती आने के लिए 800 रुपये किराया देना पड़ा। वहां गाड़ी के इंतजार में घंटों बीत गए। आठ बजे रात में एक कार मिली। मुंहमांगा किराया देने पर पहुंचाया।
जुल्कर अली, रोडवेज
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हड़ताल को खत्म कराने के लिए सरकार को पहल करनी चाहिए। वरना कुछ दिन में हाहाकार मच जाएगा। सब्जी एवं रोजमर्रा जरूरत की अन्य वस्तुएं महंगी हो जाएंगी। आम आदमी परेशान होगा।
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-गुड्डू, पिकौरा शिवगुलाम
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