प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भरण-पोषण मामले में बस्ती के डीएम से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है। कोर्ट ने कहा कि परिवार न्यायालय की ओर से जारी 13.40 लाख रुपये की वसूली प्रमाणपत्र (रिकवरी सर्टिफिकेट) का पालन अब तक क्यों नहीं हुआ। यह सवाल न्यायमूर्ति प्रवीन कुमार गिरि ने पति की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए पूछा है।
पति की ओर से गौतमबुद्ध नगर के परिवार न्यायालय के 30 जून 2022 के आदेश को चुनौती दी गई है। आरोप लगाया है कि परिवार न्यायालय ने एकतरफा आदेश देते हुए सीआरपीसी की धारा-125 के तहत पत्नी को भरण-पोषण देने का निर्देश दिया था, जो बकाया राशि बढ़कर 13,40,000 रुपये हो गई है। राशि की वसूली के लिए 26 नवंबर 2025 को परिवार न्यायालय ने बस्ती के डीएम को आदेश भेजा कि रकम भू-राजस्व बकाया की तरह वसूल की जाए। वहीं, बस्ती के हर्रैया तहसीलदार की रिपोर्ट में कहा गया कि पति के नाम कोई चल-अचल संपत्ति नहीं है, जिससे वसूली संभव हो सके।
कोर्ट ने बस्ती के डीएम को निर्देश दिया कि वे मामले की जांच कर व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल करें। कोर्ट ने कहा कि यदि आदेश के अनुपालन में ढिलाई पाई गई तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कड़े आदेश पारित किए जाएंगे। अगली सुनवाई 11 मार्च को होगी। ब्यूरो