बस्ती। निदेशालय स्तर से सख्ती के बाद बिजली निगम की कार्यप्रणाली ढर्रे पर नहीं आई। निचले पायदान से लेकर ऊपर तक जिम्मेदारों के मनमानी की तूती बोलती है। घरेलू एवं कामर्शियल उपयोग के कनेक्शन बिना खंभे और तार के ही दे दिए जा रहे हैं।
जानकार बताते हैं कि धरातल पर निगम की पूरी व्यवस्था संविदा लाइनमैन एवं अन्य कर्मियों पर निर्भर होकर रह गया है। जिम्मेदार इन्हें आगे करके एक किलोवॉट के सामान्य घरेलू कनेक्शन पर 2500 रुपये की जगह 4 से 5 हजार रुपये की वसूली करा रहे हैं।
इतनी रकम मिलने के बाद जिम्मेदार अपने पोर्टल पर कनेक्शन के लिए उपयुक्त होने की रिपोर्ट लगाकर कार्रवाई आगे बढ़ा दे रहे हैं। मोटी कमाई के चक्कर में कनेक्शन आवंटन से पहले दूरी, खंभा आदि का सत्यापन नहीं किया जा रहा है। यही वजह है कि शहर की दो दर्जन नई कॉलोनियों में बिना बिजली के खंभे और तार के ही सैकड़ों कनेक्शन आवंटित कर दिए गए हैं।
निगम का मानक है कि खंभे से 40 मीटर की दूरी में ही बिजली के कनेक्शन दिए जा सकते हैं। मगर शहर के विस्तार क्षेत्र की कॉलोनियों में 200 से 250 मीटर की दूरी में कनेक्शन दिया गया है। पचपेड़िया विस्तार क्षेत्र, मड़वानगर, रौतापार, तुरकहिया, लौकियहवा, पुरानी बस्ती क्षेत्र के महदेव ताल बस्ती खास, चइयाबारी, जामडीह, मनहनडीह, लखनऊरा आदि विस्तार क्षेत्र में कनेक्शन बांट दिए गए हैं।
इन जगहों पर बिजली के खंभे और ट्रांसफार्मर नहीं है। बांस-बल्लियों के सहारे इन कॉलोनियों में बिजली के तार दौड़ाए गए हैं। इनके खिंचाव से बांस-बल्ली भी जमीन की ओर झुक गए हैं। इसके अलावा केबिल भी झूलते नजर आ रहे हैं।
इन केबिलों से अक्सर हादसे हो रहे हैं। जानकार बताते हैं कि लंबी दूरी के कनेक्शन के लिए संविदा कर्मियों के हिसाब से मनमाना शुल्क देना पड़ता है। एक किलोवॉट पर 4 से 5 हजार और दो किलोवॉट पर आठ हजार रुपये तक वसूला जा रहा है, जबकि वाजिब फीस एक किलोवॉट पर 2500 और दो किलोवॉट पर 3600 रुपये हैं।
आवेदक की ओर से रुपये दिए जाने के एक-दो दिन के बाद अवर अभियंता की रिपोर्ट लग जाती है। इसके बाद कनेक्शन आवंटित हो जाता है। पोल से घर तक तार दौड़ाने और मीटर लगवाने के नाम पर 500 से 1000 रुपये अतिरिक्त लिए जाते हैं। यह खेल लगभग सभी उपकेंद्रों पर चल रहा है।