छोटे पिकअप अग्निशमन वाहनों की कमी, सूचना मिलने पर दौड़ते हैं बड़े वाहन
नई कॉलोनियों में बीडीए मानक के अनुरूप रास्ते का हो निर्माण तो बन जाए बात
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। यदि शहर की संकरी गलियों अथवा घनी आबादी के बीच आग भड़क उठी तो काबू कर पाना आसान नहीं होगा। क्योंकि अग्निशमन विभाग के पास पर्याप्त संसाधन नहीं है। संकरी गलियों में पहुंचाने के लिए छोटे अग्निशमन वाहनों की कमी है। शहरी क्षेत्र की डेढ़ लाख एवं आसपास के गांवों को मिला लिया जाए तो तीन लाख आबादी पर सिर्फ एक बड़ा और दो छोटे दमकल वाहन उपलब्ध हैं। ऐसे में गलियों में आग लगने पर फायर बिग्रेड की टीम तत्काल सक्रिय नहीं हो पाती है। इसके पहले टीम को जुगाड़ पर जुगाड़ लगाना पड़ता है।
मंगलवार की रात खीरी घाट के नई कॉलोनी में एक इलेक्टि्रक सामानों के गोदाम में आग लग गई। गोदाम का दरवाजा बंद था। आग लगने की खबर किसी को नहीं हुई। भीतर आग देर तक सुलगती रही। गोदाम में रखे सामान जब धूं- धूं कर जलने लगे। गर्म होने फूटकर आवाज करने लगे तो अगल-बगल के लोगों को कुछ अनहोनी का अहसास हुआ। छतों पर आकर या बाहर निकलकर लोगों ने देखा तो टीन शेड के गोदाम से आग की लपटें निकल रही थीं। इसके बाद तो मोहल्ले में शोर-शराबा के साथ भगदड़ जैसी स्थिति हो गई।
आग फैलने के डर से लोग घरों से निकलकर बाहर भागने लगे। आसपास आग से बचाव के कोई ठोस उपाय भी नहीं थे। आनन-फानन इसकी सूचना डायल 101 के माध्यम से अग्निशमन विभाग दी गई। विभाग रात के समय पहल तो की, मगर यह कारगर होते होते काफी देरी हो गई। इससे गोदाम में रखा कोई भी सामान सुरक्षित नहीं बचाया जा सका। सबसे पहले अग्निशमन दल बड़े वाहन के साथ पहुंचा। मगर, गली में बसे मोहल्ले के मुहाने परआकर खड़ा हो गया। जहां दमकल की गाड़ी खड़ी की गई, वहां उसे घुमाने की भी जगह नहीं बची थी। विभागीय कर्मचारी बचाव कार्य के लिए जुगाड़ बनाने में जुट गए। पाइप से पाइप जोड़कर गोदाम तक पहुंचाने में काफी वक्त गुजर गया। इतने उपाय के बाद भी आग पर काबू नहीं पाया जा सका।
इसके बाद छोटे दमकल वाहन बुलाए गए। तब जाकर आग पर काबू पाया जा सका। यह सब होते दो से ढाई घंटे लग गए। इतनी देरी में गोदाम में रखा सबकुछ जलकर नष्ट हो गया। ऐसे ही शहर में तमाम मोहल्ले हैं जहां आग लगने के बाद बचाव कार्य करने में कठिनाई होगी। पुरानी बस्ती क्षेत्र के चिकवा टोला, पठान टोला, नरहरिया, खटिक टोला, रानी पोखरा, गांधीनगर क्षेत्र के माली टोला, तुरकहिया, रहमतगंज आदि मोहल्लों में बड़े दमकल वाहन नहीं पहुंच सकते हैं। जबकि, छोटे दमकल वाहनों की संख्या ही पर्याप्त नहीं है। ऐसे में दमकल वाहनों को दूर खड़ा कर पाइप लाइन बिछाने में ही ज्यादा वक्त बीत जाता है।
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बीडीए का मानक होगा कारगर
आग लगने की घटनाओं के दृष्टिगत नई कॉलोनियों में बीडीए का मानक कारगर हो सकता है। बीडीए ने नई कॉलोनियों में 30 फीट का रास्ता अनिवार्य किया है। इसके अलावा पार्क के रूप में खाली जगह भी छोड़नी पड़ती है। आपातकाल स्थितियों में इस मानक की व्यवस्था ही काम आती है।
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जुगाड़ से पहुंचाई जाती है बिजली
आवासीय निर्माण हो या कामर्शियल कुछ जगहों पर बिजली जुगाड़ कर पहुंचाई जा रही है। यही आग लगने की वजह बन रही है। केबल के सहारे मीटर तक बिजली पहुंचने के बाद खुले में तार दौड़ा दिया जा रहा है। बिना वायरिंग के बिजली की आपूर्ति शुरू हो जा रही है। अक्सर यह तार आपस में रगड़ खाकर कट जाते हैं। इस वजह से शाॅर्ट सर्किट होने लगती है। इससे निकलने वाली चिंगारी आग लगन का कारण बनती है। तीन माह पहले शॉर्ट सर्किट के चलते शहर के एक टेंट गोदाम में भी आग लग गई थी।
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अग्निशमन के पास उपलब्ध संसाधन
कोतवाली, वाल्टरगंज एवं पुरानी बस्ती थाना क्षेत्र की तीन लाख से अधिक आबादी के बीच अग्निशमन विभाग के पास केवल तीन दमकल वाहन है। इसमें एक बड़ा वाहन 8 हजार लीटर क्षमता का है। जबकि एक छोटा दमकल वाहन 2500 और उससे छोटा एक दमकल वाहन 400 लीटर क्षमता का है।
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कोट
आग बुझाने वाली गाड़ियोंं की जितनी जरूरत है, उतनी नहीं हैं। बृहस्पतिवार को शासन स्तर से एक नया फायर टेंडर भेजा गया है। कुछ और गाड़ियों की आवश्यकता है। तीन तहसील और एक मुख्यालय को मिलाकर चार गाड़ियां उपलब्ध हैं। ऐसे में एक साथ दो-तीन जगह आग लगने पर मुश्किल होती है। इस समय अग्निशमन विभाग के पास पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध हैं।
-यतींद्र नाथ, मुख्य अग्निशमन अधिकारी