बस्ती। चैत महीने में 20 से 28 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से बहती पछुआ बयार में झूलते तार अन्नदाताओं की किस्मत को राख्ा कर रहे हैं। इसी सीजन में 15 फरवरी से लेकर अब तक कप्तानगंज, हर्रैया, मुंडेरवा, सोनहा, परशुरामपुर क्षेत्र की सौ बीघे से ज्यादा फसल राख कर चुके बिजली के झूलते तारों को ठीक करने का प्रयास तक नहीं किया गया। खेतों से होकर गुजरी लोकल और हाईटेंशन लाइन के तार सटते ही तेज चिंगारी फूस या फसल की डंठल पल भर में शोला बनते देखने के बावजूद जिम्मेदारों की आंख पर परदा पड़ा है। सरकारी मदद लेने के एवज में मुआवजा और सहायता पाने के लिए दफ्तरों के इतने चक्कर लगवाए जा रहे हैं कि जरूरतमंद को चक्कर आ जाए।
घुमा-फिराकर गरीब व कम पढ़े-लिखे किसानों को जिम्मेदार और लापरवाह बताकर खिल्ली उड़ाने वाले बाबुओं को भी नहीं फिक्र है, जिनकी दो तिहाई तादाद खुद यह दंश झेल रही है। प्रभारी एसपी नरेंद्र कुमार सिंह का कहना है कि फायर विभाग किसी भी आग को लेकर संवेदनशील है। बिजली विभाग से ढीले तारों को कसने और चिंगारी से आग लगने की घटना रोकने का उपाय करने का आग्रह किया है।
हालांकि विद्युुत वितरण खंड प्रथम के अधिशासी अभियंता इं. एके सिंह का कहना है कि ढीले तारों को ठीक करने का काम तेजी से चल रहा है।
बिजली विभाग के अधिकारियों का कहना है कि गांवों में अटल ज्योति अभियान के तहत बिजली के खंभे व तारों के स्थान पर प्लास्टिक कोटेड केबिल लगाई जा रही है लेकिन अभी जिले के ज्यादातर गांवों में यह काम बाकी है। लेकिन खेतों से होकर निकले बिजली के खंभे व तार को बदलने और कसने की पहल नहीं हुई, जिसके कारण तेज हवा में या तो तार टूट कर फसल में गिर रहे हैं। या स्पार्किंग की चिंगारी आलग लगाने की वजह बन रही है।
- आग लगने पर तुरंत सौ या 101 नंबर पर सूचना देने में कतई देर न करें। यह न सोचें कि कोई दूसरा सूचना दे चुका होगा।
- आग लगने पर सबसे पहले बहुत जोर से आग-आग चिल्लाकर लोगों को सचेत करें। ध्यान रहे कि चेतावनी कम से कम शब्दों में ही दें। जिससे घटना की गंभीरता समझने में वक्त जाया न करना पड़े।
- धुएं से घिरने पर अपने नाक और मुंह को गीले कपडे से ढक लें।
- आग बुझाते समय झुलसे व्यक्ति को कम्बल से लपेट दें और जितनी जल्दी हो सके, उपचार के लिए ले जाएं। कभी भी इधर-उधर न भाग फौरी राहत के लिए जमीन पर लेट जाएं या कम्बल ओढ़ें। इस दौरान यह ध्यान रखें कि जले स्थान पर पानी न पड़े। शहद लगाया जा सकता है। किन्तु, गम्भीर घावों पर कुछ न लगाएं।