मुंडेरवा। चीनी मिल मुंडेरवा प्रांगण में चल रही नौ दिवसीय देवी भागवत कथा के पांचवें दिन आचार्य दयानिधान पांडेय ने कहा कि मनुष्य को अपनी पीड़ा के लिए संसार को दोष नहीं देना चाहिए, बल्कि अपने मन को समझाना चाहिए। उनके अनुसार, व्यक्ति के दुखों का अंत उसके मन के परिवर्तन में निहित है। सबसे पहले अपने मन पर नियंत्रण रखना जरूरी है।आचार्य ने बताया कि प्रभु हमें इस संसार में निश्चित रूप से भेजते हैं। जीवन में ना कुछ लेकर आते हैं और ना ही जाते समय कुछ ले जाना पड़ता है। केवल हमारे कर्म और ईश्वर का लिया हुआ हरि नाम हमेशा हमारे साथ रहता है। उन्होंने कहा कि ध्यान मात्र से ही मनुष्य का मनोबल बढ़ जाता है। जोखन अग्रहरि, लक्ष्मण मौर्या, सुंदर, मोलहू, रमेश, सुधीर, अंजीत जायसवाल आदि उपस्थित रहे। संवाद