बस्ती। कोडीन युक्त सिरप को लेकर उठे बवंडर में बस्ती का नाम भी लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। यहां अभी कोई गिरफ्तारी तो नहीं हुई लेकिन इस धंधे की एक के बाद एक परत खुल रही है।
बता दें कि 22 नवंबर को पुरानी बस्ती थाने में पहली एफआईआर दर्ज हुआ था। वहीं नौ दिसंबर को कोतवाली में कोडीन युक्त सिरप की 1.72 लाख शीशी के गोलमाल का मामला दर्ज हुआ है। अब तक की छानबीन में पता चला है कि यह स्टॉक दवाओं की आपूर्ति के नियमित चेन से न होकर अलग नेटवर्क के माध्यम से पहुंचाया जा रहा था।
कई प्रदेशों तक फैले इस नेटवर्क के बीच बस्ती पुलिस के सामने सबसे बड़ा संकट केस से जुड़े साक्ष्य जुटाने का है। चूंकि इस मामले में उच्च स्तर से एसआईटी भी जांच कर रही है, इसलिए पुलिस अपनी छानबीन में फूंक फूंककर कदम रख रही है। माना जा रहा है कि पुलिस के लिए इस गिरोह की तह तक पहुंच पाना आसान नहीं होगा।
बता दें कि मंगलवार को कोतवाली में शहर के गणपति फार्मा के संचालक पंकज साहनी के खिलाफ औषधि निरीक्षक अरविंद कुमार ने केस दर्ज कराया था। जिसमें कहा गया था कि झारखंड के रांची की कंपनी से भेजी गई 1.72 लाख शीशी न्यू फेनसिडिल सिरप की सप्लाई हुई। जिसे शहर की चार फार्मा के माध्यम से गणपति फार्मा को आपूर्ति की गई।
औषधि निरीक्षक की जांच में पाया गया कि गणपति फार्मा ने उक्त चारों फर्मों से सिरप तो खरीदा लेकिन वे शीशियां किसे बेची गई इसका लेखाजोखा नहीं मिल पाया। इससे जाहिर है कि नशे के लिए इस्तेमाल करने के लिए उसे अवैध तरीके से बेचा गया।
इससे पहले 22 नवंबर को आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन समेत अन्य उच्चाधिकारियों ने औषधि निरीक्षक अरविंद कुमार को पांडेय बाजार बांसी रोड पर स्थित मेसर्स गोयल फार्मा पर छापेमारी के निर्देश दिए गए। इस दौरान दौरान कोडीन युक्त औषधि से निर्मित कोडिवा कफ सिरप और ट्राॅमाडोल तत्व मिश्रित कैप्सूल, साइकॉट्रॉपिक दवाएं और शेड्यूल-एच एवं एक्स की दवाइयों का स्टॉक बरामद हुआ है। अधिकांश दवाओं के बिल, फार्म-35, फार्म-21 और खरीद-विक्रय रजिस्टर मौके पर मौजूद नहीं थे। टीम के अनुसार स्टॉक और बिलिंग में भारी अंतर मिला था।
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लखनऊ की फर्म से आई थी सप्लाई
पुरानी बस्ती में जो एफआईआर दर्ज की गई थी, उसमें पांडेय बाजार की रहने वाली खुशबू गोयल पत्नी शंकर गोयल के साथ ही लखनऊ की मेसर्स मेगा लॉजिस्टिक्स के अज्ञात मालिकों, तथा ऋत्विक गोयल निवासी अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया गया था। प्रारंभिक पड़ताल में यह भी सामने आया कि दवाइयों की सप्लाई लखनऊ के ट्रांसपोर्ट नगर गोदाम से विभिन्न जिलों तक की जा रही। यह स्टॉक मेडिकल दुकानों तक नियमित चेन से न होकर अलग नेटवर्क के माध्यम से पहुंचाया जा रहा था। विवेचक एसएचओ जयदीप दुबे ने बताया कि लेनदेन से जुड़े साक्ष्य एकत्र किए जा रहे हैं।