बस्ती। उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने को लेकर बंदी रक्षकों को कठघरे में खड़ा करने का दांव जेल प्रशासन पर उल्टा पड़ गया। शासन ने प्रकरण का संज्ञान लेकर पहले जेलर को हटाया। प्रभारी जेल अधीक्षक का कार्यभार देख रहे एडीएम से प्रभार भी वापस ले लिया गया। गोरखपुर जनपद कारागार के जेल अधीक्षक ओपी कटियार को यहां के अधीक्षक का भी प्रभार सौंप दिया गया। बंदी रक्षक इसे अपनी जीत मान रहे हैं, लेकिन बताया जा रहा है कि अनुशासन की तलवार अब भी उन पर लटकी हुई है। डीआईजी जेल एके सिंह ने बताया कि प्रकरण में अभी जांच चल रही है। प्रदर्शन करने वाले बंदी रक्षकों को स्पष्टीकरण देने की नोटिस दी गई थी। उनमें कुछ ने अभी जवाब नहीं दिया है। उनका जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
18 अप्रैल को जिला कारागार के बंदी रक्षकों ने तत्कालीन जेलर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। 21 बंदी रक्षक कलेक्ट्रेट पहुंच गए और छुट्टी के लिए परेशान करने, पक्षपात करने और अपशब्द कहने का आरोप लगाते हुए डीएम प्रियंका निरंजन को ज्ञापन सौंपा। आरोप लगाया था कि जेलर सतीश चंद्र त्रिपाठी विगत तीन हफ्तों से विषम परिस्थितियों में अवकाश नहीं दे रहे हैं। इसका कोई कारण भी नहीं बताते और अपशब्दों का प्रयोग करके भगा देते हैं। कर्मचारियों को इन्कार आदेश (डीओ) और निलंबन का हवाला देकर डराते-धमकाते हैं। जबकि कुछ चुनिंदा बंदी रक्षकों को गुप्त रूप से अवकाश देकर सरकारी कार्य का हवाला देते हैं। डीएम ने इन आरोपों की जांच के लिए एडीएम कमलेश बाजपेयी जांच अधिकारी नामित किया था।
माना जा रहा था कि वर्दी में प्रदर्शन करने वाले बंदी रक्षकों पर गाज गिर जाएगी, लेकिन दांव उल्टा पड़ गया। इस प्रकरण के सामने आने के तीसरे ही दिन शासन ने जेलर सतीश चंद्र त्रिपाठी को मुख्यालय से संबद्ध कर दिया। बाद में अधीक्षक का प्रभार देख रहे एडीएम ने प्रभार वापस ले लिया गया।