महराजगंज (बस्ती)। किसानों की आय दोगुनी करने के लिए रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने की नसीहत दी जा रही है। मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के लिए हरी खाद पर जोर दिया जा रहा है। लेकिन, इन दिनों हरी खाद के लिए सनई-ढैंचा के बीच का इंतजाम नहीं है। धान की रोपाई की तैयारी में किसान हरी खाद बनाने के लिए ढैंचा व सनई के बीज के लिए चक्कर लगा रहे हैं। कृषि विभाग के किसी गोदाम में ढैंचा व सनई का बीज नहीं है।
खेतों में उर्वरा शक्ति बढ़ाने के लिए किसान गेहूं की कटाई करने के बाद अप्रैल से मई के बीच ढैंचा और सनई की बुवाई कर के धान की रोपाई से पहले हरी खाद बनाते हैं। इससे खेत की उर्वरा शक्ति बढ़ने के साथ भूमि में जीवाश्म कार्बन की मात्रा बढ़ती है। हरी खाद को बढ़ावा देने के लिए कृषि विभाग लगातार प्रचार-प्रसार भी करता है। लेकिन, समय से बीज का आवंटन नहीं कर पा रहा है।
जिला कृषि अधिकारी बाबूराम मौर्य ने बताया कि कंपनी से ढैंचा व सनई का बीज उपलब्ध नहीं हो पाया है। बीज आने की अभी कोई संभावना नहीं दिख रही है।
ढैंचा की बुवाई सामान्यतया 15 मई तक कर देनी चाहिए। इस समय वर्षा से खेत में नमी होने से किसान इसकी बुवाई के लिए परेशान हैं। एक एकड़ में लगभग 10 से 15 किलो बीज पर्याप्त है। - वीरेंद्र ओझा, खैरी ओझा
कृषि गोदाम पर ढैंचा बीज मांगने पर कहा जाता है कि उपलब्ध नहीं हैं। ढैंचा की बुवाई खेतों में उर्वरा शक्ति बढ़ाती है। इससे पैदावार भी अधिक होती है। - रामधनी पांडेय, सेमरिया (जगदीशपुर)
किसान को समय से बीज और कीटनाशक उपलब्ध नहीं कराया जाता है। सरकार किसान की आय दोगुना करने का ढिंढोरा पीटती है। कृषि विभाग को इस पर ध्यान देना चाहिए। -गंगाराम, उभाई गांव
रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक इस्तेमाल से भूमि की उर्वरा शक्ति कम होती जा रही है। ऐसे में हरी खाद को बढ़ावा देना चाहिए। लेकिन, बीज न मिल पाना बहुत ही दुखद है। -शिवनारायण शुक्ल, देवरी