बस्ती आरपीएफ ने रेलवे ई टिकट के अवैध कारोबार करने वाले को किया गिरफ्तार।
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टेरर फंडिंग करने वाले गिरोह के दो और गुर्गे धरे गए
बस्ती। आईआरसीटीसी की व्यवस्था में सेंध लगाकर ई-टिकटिंग के धंधे से अकूत धन कमा टेरर फंडिंग करने वाले गिरोह के दो और गुर्गों को आरपीएफ ने दबोच लिया। इनमें एक को लुधियाना पंजाब में फर्जी आईडी मुहैया कराता था, जबकि दूसरा आरोपी एएनएमएस का पैनल चलाकर टिकट एजेंटों को मुंबई से साफ्टवेयर उपलब्ध कराता था। दोनों ने पूछताछ में तमाम तथ्य आरपीएफ को दिए हैं, जिस पर आरपीएफ ने तानाबाना बुनना शुरू कर दिया है।
आरपीएफ के निरीक्षक नरेंद्र यादव को सूचना मिली कि मुंबई का एएनएमएस साफ्टवेयर का धंधेबाज अपने जिले में है। इस सूचना के बाद टीम ने रेलवे स्टेशन के निकट से किफायतुल्लाह नामक धंधेबाज को गिरफ्तार किया। यह अपने धंधे के लिए यहां आया था। इसके पास से टीम ने 12.38 लाख के टिकट बरामद किए हैं। किफायतुल्ला दो वर्ष से इस धंधे में लिप्त था। वह हामिद अशरफ गिरोह के सक्रिय सदस्य शमशेर के माध्यम से साफ्टवेयर लेकर टिकट एजेंटों को मासिक किराए पर उपलब्ध कराता था। गिरफ्तार आरोपी ने बताया है कि वह वाट्सएप के माध्यम से टिकट एजेंटों को साफ्टवेयर उपलब्ध कराता था। उसने स्वीकारा है कि वह देश के तमाम हिस्सों में अपने इस धंधे का संचालन करता है। निरीक्षक यादव के साथ टीम में शामिल कांस्टेबल मानसिंह, इंद्रजीत गिरी, सुरेंद्र गौतम, कमलेश चौबे, कुंवर विशाल सिंह ने इस धंधेबाज से तमाम जानकारी हासिल की है। इस सुपरसेलर ने कई अन्य नामों का भी खुलासा किया है।
इसी क्रम में आरपीएफ की इस टीम ने पंजाब के लुधियाना से भी एक सुपरसेलर को दबोचा है। इस यहां रेलवे एक्ट का मुकदमा भी दर्ज है। आरपीएफ ने फोकल पॉइंट छह लुधियाना पंजाब निवासी प्रदीप कुमार को भी दबोचा है। यह सुपरसेलर ई-टिकटिंग के कारोबारियों को आईआरसीटीसी की फर्जी आईडी उपलब्ध कराता था। पूछताछ में प्रदीप ने बताया कि वह गिरोह को एक हजार से अधिक फर्जी आईडी उपलब्ध करा चुका है।
आरपीएफ निरीक्षक नरेंद्र यादव ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि पूछताछ में इन धंधेबाजों ने कई और नाम बताए हैं जो देश के विभिन्न हिस्सों में इसी धंधे से जुड़े हैं।