आवास विकास में एक छतपिर बैठे बंदर- जागरुक पाठक
बस्ती। जिले में बंदरों का आतंक एक बार फिर बढ़ता जा रहा है। मई-जून में कुछ जगह इन्हें पकड़ने का अभियान चलाने के बाद कुछ राहत थी लेकिन इधर एक हफ्ते के भीतर फिर से इनकी झुंड आक्रामक होकर जिले के विभिन्न हिस्सों में विचरण कर रही है। इनसे निजात पाने की मुकम्मल व्यवस्था न होने की वजह से लोग परेशान हैं।
2022 में हुई पशु गणना के मुताबिक जिले में महज 2,775 बंदर मौजूद हैं। इनमें 1,237 नर, 819 मादा व बाकी बच्चे हैं। कप्तानगंज रेंज में 513, हरैया में 439 व रामनगर में 477 बंदर विचरण कर रहे हैं, वहीं अकेले बस्ती सदर रेंज में 1,346 बंदर मौजूद हैं। जबकि हकीकत में इससे कई गुना अधिक इनकी तादाद हो गई है।
विक्रमजोत क्षेत्र के अमरजीत सिंह, रघुपति सिंह, विनोद चौधरी आदि बताते हैं कि अयोध्या की तरफ से बंदरों को पकड़कर आसपास के जिलों में छोड़ दिया जा रहा है। पशु प्रेमी अमरजीत सिंह बताते हैं कि पर्याप्त भोजन न मिलने के कारण बंदर कई बार हिंसक होकर हमले कर रहे हैं। 16 अक्तूबर को गौर-वाल्टरगंज मार्ग पर गटरा पुल के पास बंदरों ने चकचई गांव की रहने वाली लक्ष्मी पर हमला कर दिया था। वह परिजनों के साथ बाइक से बस्ती जा रही थी।
मई में मुंडेरवा थाना क्षेत्र के गंगौरी गांव में बंदरों के उत्पात से कई दिनों तक राहगीर परेशान रहे। सड़क से गुजरने वाले बच्चों और राहगीरों को दौड़ा घायल कर दे रहे थे। पिछले वर्ष सितंबर से नवंबर तक दो महीने तक मुंडेरवा-महादेवा क्षेत्र में ग्रामीणों लिए एक लंगूर खौफ का पर्याय बना हुआ था। बाद में गांव के लोगों ने चंदा लगाकर मंकी कैचर टीम बुलाया। ठेकनापार गांव के पास उसे पकड़कर कैंपियरगंज जंगल में ले जाकर छोड़ा गया।