बस्ती। विद्युत निगम में बड़ा गड़बड़झाला सामने आया है। ठेकेदारों के फर्जी दस्तावेज पर लंबे समय से टेंडर आवंटित किया जा रहा है। निर्माण कार्य करने वाली फर्मों के पंजीकरण और अनुबंध पत्र में संलग्न हैसियत, चरित्र, बैलेंस शीट जैसे जरूरी प्रपत्र कूटरचित पाए गए हैं। जांच में इसकी पुष्टि के बाद हड़कंप की स्थिति है।
दो महीने से मामले को दबाने की कोशिश चल रही है। आनन-फानन में एक टेंडर भी निरस्त किया जा चुका है। खबर है कि फर्जी दस्तावेज लगाने वाली कुछ फर्मों ने पूर्व में आवंटित विद्युत निर्माण कार्यों को काफी हद तक पूर्ण भी कर लिया है। अब इनके भुगतान का ताना-बना बुना जा रहा है।
अधीक्षण अभियंता कार्यालय विद्युत कार्य मंडल में निर्माण करने वाली फर्मों का पंजीकरण फर्जी दस्तावेज पर कर दिया जा रहा था। इसमें बड़े निर्माण कार्यों को हथियाने के लिए ठेकेदार विभागीय सांठगांठ से करोड़ों का कूटरचित हैसियत प्रमाण पत्र, फर्जी चरित्र प्रमाण पत्र और बैलेंस शीट तक का इस्तेमाल किया गया। इन्हीं प्रपत्रों के आधार कई फर्मों ने निगम के निर्माण इकाई विद्युत कार्य खंड और वितरण खंड के अधीन होने वाले विद्युत उपकेंद्रों की मरम्मत, क्षमता वृद्धि, लाइन निर्माण, जमा योजना के विद्युत कार्यों का कई टेंडर भी लिया गया है।
बताया जा रहा है कि जिन फर्मों के दस्तावेज फर्जी मिले हैं उनसे जुड़े ठेकेदारों का रसूख विभाग में लंबे समय से हैं। पिछले दिनों अधीक्षण अभियंता विद्युत कार्य मंडल ने निर्माण कार्य करने वाली फर्मों के हैसियत, चरित्र जैसे जरूरी प्रपत्रों की जांच के लिए टीम गठित की।
एक्सईएन विद्युत माध्यमिक कार्य खंड के स्तर से मामले की जांच की गई। एक फर्म का हैसियत प्रमाण पत्र, एक का चरित्र और तीसरी फर्म की बैलेंस शीट कूटरचित पाई गई है।
जानकारों का कहना है कि निगम में कार्य करने वाली इन फर्मों के दस्तावेज फर्जी होने के खुलासे के बाद महकमा सकते में आ गया। आनन-फानन में विक्रमजोत पंप कैनाल के लाइन निर्माण का टेंडर निरस्त कर दिया गया। लेकिन, इसके बाद कार्रवाई से हाथ खींच लिए गए। बताया जा रहा है कि कुछ फर्मों ने इन्हीं कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर पूर्व में कई कार्यों का टेंडर भी हासिल किया है, जिन्हें काफी हद पूर्ण कर लिया गया है।