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जिले में लक्ष्य से भटका शौचालय अभियान

Thu, 24 May 2018 11:06 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला बस्ती
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कई जगहों पर नहीं मिला शौचालयों का निर्माण और प्रयोग - फोटो : अमर उजाला
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बस्ती। जिले को शौच मुक्त की योजना के तहत 3102 गांवों में 1.85 लाख शौचालय निर्माण का लक्ष्य तय किया गया है। इसके लिए 2019 तक की समय सीमा तय है, लेकिन वर्तमान प्रगति के मुताबिक निर्धारित समय में पूरा हो सकेगा इसमें संदेह ही है। खास बात यह कि दो चार घरों के पुरवे को ओडीएफ घोषित किया गया है, जिसकी अबादी कम है।             
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दो फरवरी 2014 को शुरू की गई योजना में अब तक 1.10 लाख शौचालय ही बनाए जा सके हैं। जिसमें अब तक 147 गांव ही ओडीएफ (खुले में शौच से मुक्त) हुए हैं। लेकिन इन गांवों में सब कुछ कागजी ही है। घोषित गांवों को भी शत-प्रतिशत ओडीएफ नहीं किया जा सका है। शेष 2955 गांवों कोे 2019 तक खुले में शौच मुक्त कर पाना संभव होगा, इस पर विश्वास नहीं। हालांकि विभागीय अफसर शेर सिंह ने कहा कि शत-प्रतिशत खुले में शौच मुक्त के लिए अभी और प्रयास करने की जरूरत है। इसके लिए जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है समय सीमा में कार्य पूरा होगा।              
गौर विकासखंड के छह ग्राम सभा सभाओं में सचिव व ग्राम प्रधान की ओर से कुल 45 शौचालय निर्माण करा कर ओडीएफ घोषित कर दिया गया है। जबकि हकीकत कुछ और ही है। ग्राम पंचायत तेनुआ के ग्राम सभा पानापेटी में मात्र एक घर का पुरवा है। जहां शौचालय का निर्माण करा कर ओडीएफ तो घोषित कर दिया गया, लेकिन शौचालय की उपयोगिता नहीं के बराबर है। इसी तरह ग्राम पंचायत पकड़ी जप्ती के गोरथनिया में भी एक ही घर है। जो ओडीएफ घोषित किया गया है। मगर शौचालय निर्माण आधा-अधूरा है। जबकि ग्राम पंचायत महुआ डाबर के राघवपुर गांव में कुल 10 घरों में स्वच्छ भारत अभियान के तहत शौचालय निर्माण कराया गया है। लेकिन इसमें से चार शौचालय ऐसे हैं, जो आधा-अधूरा कर छोड़ दिया गया है। जो उपयोग की श्रेणी में नहीं है। मगर कागजों में गांव को ओडीएफ घोषित किया गया है।            
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