विक्रमजोत के गौरियानयन के पास बंधे को बचाने के लिए हो रहा काम।
लोलपुर-विक्रमजोत बांध स्थित गौरियानैन के पास शनिवार भोर करीब 3.30 बजे घाघरा की धारा से नौ नंबर ठोकर का एक हिस्सा ढहकर नदी में समा गया। बाढ़ खंड के अभियंता बोल्डर से कटान नियंत्रण की कोशिश में लगे हैं। लखनऊ से मुख्य अभियंता सीडी राम ने भी कटान स्थल का जायजा लिया। अधीनस्थों को आवश्यक निर्देश देकर वे लखनऊ चले गए।
रात में स्पर के ढहते ही आनन फानन में गांव वालों ने विभाग के जेई ज्ञानप्रकाश जायसवाल और दयाशंकर सिंह को सूचना दी। बाढ़ विभाग के कर्मचारी कटान स्थल पर पहुंच गए। आनन फानन में मजदूर लगाकर बोल्डर और झांवा (ईंट के रोड़े) डालने का काम शुरू कर दिया। विक्रमजोत लोलपुर बांध का यह हिस्सा गौरियानैन सहित आधा दर्जन गांव का ढाल बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है विगत वर्ष की बाढ आपदा से सीख न लेकर विभाग ने इस साल भी लापरवाही की जिससे बंधे पर कटान की समस्या बढ गई। स्पर के ढहने से तटवर्ती गांवों को खतरा बना हुआ है।
विभाग के मुख्य अभियन्ता चन्द्रदेव राम लखनऊ से विक्रमजोत लोलपुर बांध के गौरियानैन गांव पहुंचे। बाढ राहत कार्यों का जायजा लिया और अधीनस्थ अधिशाषी अभियन्ता राजीव कुमार सिंह, ज्ञान प्रकाश जयसवाल व अमित सिंह को बांध एवं ठोकरों की सुरक्षा के लिये दिशा निर्देश देकर वापस चले गए। गांव वालों ने मुख्य अभियंता को बताया की अभी तो बरसात का प्रथम चरण है बाद में समस्या बढ सकती है। शुक्रवार को डीएम नरेंद्र सिंह पटेल और एसपी कृपाशंकर सिंह ने भी अन्य प्रशासनिक अफसरों के साथ दौरा कर बाढ़ और कटान का जायजा लिया था। गौरियानैन में हो रही कटान के निरीक्षण के बाद बाढ़ प्रखंड के ढुलमुल रवैये पर सख्ती दिखाते हुए गांव को कटान से बचाने के लिए हर संभव उपाय करने का निर्देश दिया था। डीएम के निर्देश के बाद बोल्डर और गिट्टी गिराने के काम मे तेजी आ गई थी लेकिन बाद में इसमें लापरवाही बरती गई।
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार शनिवार सुबह सरयू (घाघरा) का जलस्तर 92.70 था जो शाम को बढ़कर 92.80 सेमी हो गया। शनिवार रात तक जलस्तर के बढ़ने की संभावना जताई है। गौरियानैन बंधे के चार स्पर पहले भी क्षतिग्रस्त हुए थे।
इस बीच सरयू नदी के जलस्तर के लगातार बढ़ने से तटवर्ती गांव चांदगांव पर भी संकट मंडराने लगा है। नदी के स्पर 12 के नोज भी नदी में बह गया है। स्पर के नोज के बहने की सूचना पर बाढ खंड के अधिकारी मौके पर पहुंचे और ईँट को बोरियों में भरकर ठोकर को बचाने के जतन में जुट गए। बंधे के किनारे बसे पहड़वापुर, विसुनदासपुर, धरमूपुर, ऐहतमाली आदि जगहों पर सरयू तेजी से कटान कर रही हैं ऐसे में गांव वालों की नींद उड़ गई है। विभाग के जेई का कहना है कि बंधे को कोई खतरा नहीं होगा विभाग पूरी सर्तक है। पारा के पास बने तीन बडे़ स्पर पर दबाव बन हुआ है। गांव के सुरेश सिंह व विजयी ने बताया कि घाघरा की धारा बंधे से होकर बह रही हैं। प्रशासन की तरफ से सुरक्षा के उपाय नकाफी हैें। जबकि चांदपुर और भिऊरा के पास कटान से वीडी बंधा संवेदनशील बना हुआ है। गांव के राजन सिंह व शोभाराम राजभर ने बताया कि खेती योग्य जमीन धारा में विलीन हो गई। अब बंधे पर खतरा आ गया है।