बस्ती। अच्छे पाठ्यक्रमों में उच्च तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा के लिए जिले की प्रतिभाओं को बड़े शहरों की तरफ पलायन करना पड़ रहा है। एमबीए और एमसीए जैसे महत्वपूर्ण पाठ्यक्रमों की सुलभ पढ़ाई न होने से हर साल सैकड़ों छात्र लखनऊ, गोरखपुर, दिल्ली और प्रयागराज जैसे महानगरों में जाने को विवश हैं।
जिले में 66 महाविद्यालय हैं। इसमें छह राजकीय व चार एडेड शामिल हैं। यहां बीए, एमए, बीएससी और बीकॉम की पढ़ाई आसानी से हो जाती है, लेकिन व्यवसायिक पाठ्यक्रमों व कंप्यूटर एप्लीकेशन जैसे क्षेत्रों में कॅरियर बनाने की इच्छा रखने वाले युवाओं को निराशा हाथ लगती है।
इन पाठ्यक्रमों में पढ़ाई करने की रुचि रखने वाले मध्यम और गरीब परिवारों के बच्चे बाहर जाकर पढ़ाई नहीं कर पाते हैं। कॉलेज की फीस के अलावा दूसरे शहरों में रहने, खाने और यातायात का खर्च उठाने में वे अक्षम होते हैं। कई अभिभावकों का कहना है कि यदि बस्ती में ही सरकारी या अनुदानित स्तर पर ये पाठ्यक्रम संचालित हों, तो उनके बच्चे कम खर्च में बेहतर भविष्य बना सकते हैं।
जिले में संचालित होती हैं इन विषयों की कक्षाएं
जिले में अधिकांश महाविद्यालयों में बीए, एमए, बीएससी, एमएससी, बीकाॅम, बीसीए, एलएलबी की कक्षाएं संचालित हो रही हैं। वहीं राजर्षि टंडन यूनिवर्सिटी में एमसीए, एमएसडल्लू, बीएससी, बीए, बीकाॅम सहित अन्य विषयों की कक्षा चल रही है।
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पीजीडीसीए की नहीं होती पढ़ाई
जिले में पीजीडीसीए पाठ्यक्रम की पढ़ाई नहीं होती है। ऐसे में बीएससी की पढ़ाई पूरी करने के बाद युवा आगे की पढ़ाई करने के लिए दूसरे शहर में जाने को विवश होते हैं।
कोट
शिक्षक संघ ने जिले में विश्वविद्यालय की स्थापना की मांग की है। वहीं तकनीकी व व्यावसायिक शिक्षा के पाठ्यक्रमों को महाविद्यालयों में मान्यता देने के लिए भी आवाज उठाई गई है। -डॉ. रघुवर पांडेय, समाज शास्त्री, महिला महाविद्यालय
कोट
डेढ़ वर्ष पूर्व सदन में विश्वविद्यालय की स्थापना की मांग को लेकर आवाज उठाए थे। अभी तक इस पर सरकार की तरफ से कोई भी स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है।
-राजेंद्र प्रसाद चौधरी, विधायक, रुधौली