अयोध्या से सटे विक्रमजोत ब्लॉक के सीमाई इलाके के करीब 27 गांव के सूर्यवंशी परिवार 500 साल बाद फिर एक बार पगड़ी बांधेंगे और चमड़े के जूते पहनेंगे। मंदिर के भूमि पूजन पर इन गांवों में घर-घर मिठाई बांटी गई। लोगों ने एक-दूसरे को शुभकामनाएं दी।
बताया जा रहा है कि इस गांव के सूर्यवंशी समाज के पूर्वजों ने मंदिर पर हमले के बाद शपथ ली थी कि जब तक मंदिर फिर से नहीं बन जाता, वे सिर पर पगड़ी नहीं बांधेंगे।
छाते से सिर भी नहीं ढकेंगे न ही चमड़े का जूता पहनेंगे। सूर्यवंशी क्षत्रीय मूलरूप से अयोध्या के बाशिंदे हैं। इसके अलावा पड़ोसी बस्ती जिले के गांवों में रहते हैं। ये सभी ठाकुर परिवार खुद को भगवान राम का वंशज मानते हैं।
सुप्रीम कोर्ट से राम मंदिर निर्माण के आदेश के बाद अयोध्या के इन गांवों में काफी उत्साह है। कवलपुर निवासी प्रमोद सिंह उर्फ पप्पू सिंह कहते हैं कि विक्रमजोत के सीमाई इलाके के 27 गांव में सूर्यवंशीे रहते हैं। कोर्ट के फैसले के बाद से इलाके में उत्साह है।
टिकारिया निवासी विजयपाल सिंह बताते हैं कि उनके पूर्वज पगड़ी नहीं पहनते थे क्योंकि शपथ थी कि जब तक राममंदिर नहीं बनेगा तब तक न तो वे पगड़ी पहनेंगे न ही चमड़े के जूते।
रणजीत सिंह कहते हैं कि सूर्य वंशियों ने सिर न ढंकने का संकल्प लिया था, लेकिन आधुनिकता में कुछ युवा भूल बैठे थे। पूर्वज संकल्प के बाद पैरों में जूते-चप्पल की जगह खड़ाऊ पहनने लगे। फिर बिना चमड़े वाले जूते-चप्पल आए तो उन्हें भी पहनने लगे, लेकिन चमड़े के जूते कभी नहीं पहने गए।