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Basti News: बाजार में निगरानी, धंधेबाज घर में चला रहे मिलावट की फैक्टरी

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बाजार में कुछ इस तरह बेंच रहे पनीर संवाद
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बस्ती। जनपद में बिकने के लिए तैयार पनीर, मिठाई, दूध-खोआ और घी में मिलावट का खेल जारी है। बताते हैं कि पिकअप के जरिये बाहर से खाद्य सामग्री की खेप पहुंच रही है। वहीं जिले में भी धंधेबाज घरों में गुपचुप तरीके से मिलावटी पनीर तैयार करके दुकानों तक पहुंचा रहे हैं। इस खेल में कुछ बड़े कारोबारी भी शामिल है।
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चिकित्सकों के अनुसार, सेवन से पेट संबंधी कई बीमारियां हो सकती हैं। ऐसे में होली में खाने-पीने का सामान लेने से पहले सावधान रहने की जरूरत है। शहर में कई स्थानों पर सस्ते दर पर पनीर बिक रहा है। जानकारों ने बताया कि होली में मिलावटी पनीर खपाने के लिए धंधेबाज हर पैतरा चल रहे हैं तो सिंडीकेट भी काम कर रहा है।
बताते हैं कि जनपद में दूध उत्पादन के हिसाब से उतना पनीर तैयार नहीं हो सकता, जितनी खपत है। ऐसे में धंधेबाज पनीर तैयार करने के लिए पाउडर वाले दूध का घोल बनाते हैं और फिर उसी दूध से पनीर बना कर बाजार में पहुंचा रहे हैं। एक व्यापारी ने बताया कि अयोध्या व अंबेडकर से पनीर मंगवाते हैं। थोक में पनीर 220 से 250 रुपये तक जबकि फुटकर में उसे 300 रुपये तक बिक जाती है।
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बताते हैं कि असली पनीर एक किलो बनाने में पांच से छह लीटर दूध लग जाता है। इसमें करीब तीन सौ रुपये का दूध लगता है। बाकी गैस और हलवाई की दिहाड़ी जोड़ दिया जाए तो 350 रुपये तक पनीर का भाव हो जाता है, ग्राहक अधिक दाम सुनकर वापस चला जाता है, ऐसे में सस्ता पनीर बाजार से मंगवाकर बिक्री करते हैं।
यही पनीर घर से लेकर आयोजनों तक में प्रयोग की जा रही है। बता दें कि खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की टीम अब तक 17.50 क्विंटल खोआ बरामद करते हुए नष्ट करवा चुकी है। इसमें मिलावट की पुष्टि हुई है।
वहीं, पूर्व में रोडवेज स्थित पनीर की फैक्टरी पर छापेमारी हुई थी। यहां से लिए गए सैंपल की जांच रिपोर्ट फेल आई थी। पनीर में मिलावटी की पुष्टि हुई थी। इसी प्रकार गनेशपुर में एक वाहन से पनीर बरामद किए थे, वह भी रिपोर्ट फेल आई थी।
पूरा नेटवर्क कर रहा काम : धंधेबाज कानपुर, बलरामपुर से जनपद में छोटी-छोटी दुकानों के जरिये लोगों तक मिलावटी खोआ व पनीर खपाने के लिए नेटवर्क तैयार कर लिए हैं। दूध का काम करने वाले एक दूधिया के मुताबिक मिलावट का असली केंद्र कानपुर है, जहां से प्रदेश के कई जनपदों को आपूर्ति होती है। पहले रोडवेज की बस की आपूर्ति होती थी।
लेकिन, लगातार धर पकड़ बढ़ने के बाद अब धंधेबाजाें ने डिलीवरी का तरीका बदल दिया है। ऐसे में अब पिकअप और अन्य बंद छोटे वाहनों से आपूर्ति की जा रही है। बताते हैं कि ऑर्डर लगाने के बाद माल आता है और छोटे चौराहों और कस्बों में लोकेशन पर खड़ा कर दिया जाता है। धंधा करने वाले मकान या दुकान में माल स्टोर कर लेते हैं। इसके बाद छोटे-छोटे हिस्से में करके मांग के हिसाब से दुकानों को सप्लाई करते हैं। पहले माल के साथ रुपये देने पड़ते थे। अब डिलीवरी के साथ ऑनलाइन भुगतान हो जाता है। यूं तो धंधा सालभर हो रहा है, मगर त्योहार में अगल चेन काम करती है। बाकी अबतक डिमांड के अनुसार लग्न में भी आपूर्ति की जा रही है।
शिकायत पर हर्रैया में छापेमारी, पनीर और रसगुल्ला का भरा नमूना : होली व ईद से पहले शहर में मिलावटखोरों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की कार्रवाई शुक्रवार को भी जारी रही। विभाग की टीमों ने शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में छापेमारी कर खाद्य नमूने संग्रहित किए।
जिला अभिहित अधिकारी चितरंजन कुमार सिंह ने बताया कि हर्रैया में शिकायत पर एक दुकान पर छापेमारी की गई। यहां संदिग्ध पनीर का नमूना भरा गया। साथ ही चमकदार चांदी वर्क का रसगुल्ला का भी नमूना लिया गया है। सैंपल जांच के लिए प्रयोगशाला भेजेंगे।
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