बस्ती। बस्ती चीनी मिल बंद होने से 110 परिवारों पर जीने का संकट खड़ा हो गया है। ये सभी मजदूर 1,111 दिन से धरने पर बैठे हैं। मिल प्रबंधन ने हाथ खड़े कर दिए हैं। मजदूरों ने मिल प्रबंधन पर धोखाधड़ी और छलावे का आरोप लगाया है।
110 मजदूर परिवार में लगभग 400 सदस्य हैं। ढलती उम्र में इन मजदूरों को कोई काम देने को तैयार नहीं है। छोटे-छोटे बच्चे होटलों सहित अन्य प्रतिष्ठानों में काम कर रहे हैं। जबकि महिलाएं मजदूरी और लोगों के घरों में झाडू पोछा करने को मजबूर हैं। आर्थिक तंगी के चलते लड़कियों की शादी भी परेशान कर रही है। कई मजदूरों के पास इलाज के लिए रकम भी नहीं है। अचानक बस्ती चीनी मिल बंद होने से सबसे अधिक प्रभाव मिल में काम करने वाले अस्थायी मजदूरों के परिवारों पर पड़ा है। रामनाथ, पंकज, धमेंद्र, नीलू बाबा, अशोक कुमार, प्रेमचंद्र दुबे, राजेंद्र प्रसाद, त्रियुगी, बच्चन और सरवन कुमार ने बताया कि मिल प्रबंधन ने बहुत बड़ा धोखा दिया है। मजदूरों का भविष्य सुरक्षित किए बिना मिल प्रबंधन ने उन लोंगो की छंटनी कर दी। मिल मजदूर मानने से ही इन्कार कर दिया। बच्चन ने बताया कि वह पिछले कई दिन से बीमार हैं, साथियों ने जिला अस्पताल में भर्ती भी कराया, मगर ठीक से इलाज न होने के कारण मजबूरी में घर वापस आना पड़ा। पंकज ने बताया कि उसका परिवार बहुत ही तंगी से गुजर रहा है, बड़ी मुश्किल से दो समय के खाने का इंतजाम हो पाता है। प्रेमचंद्र दुबे का कहना है कि उन्हें नहीं मालूम था कि सीजनल मजदूर होने का खामियाजा इस तरह भुगतना पड़ेगा। सरवन कुमार ने बताया कि उन्हें कोई इस उम्र में काम भी नहीं देता, शरीर कमजोर हो जाने के कारण वह मजदूरी तक नहीं कर पा रहा है। परिवार के लोग मजदूरी कर घर का खर्च चला रहे हैं। नीलूबाबा, अशोक कुमार और रामनाथ का कहना है कि उन्हें मिल प्रबंधन से कम और उन लोगों से अधिक नाराजगी है जो अपने आपको समाज का ठेकेदार कहते हैं। अब कोई राजनेता यह पूछने नहीं आता कि किस हाल में हो और घर का खर्चा कैसे चल रहा है। शुरू से ही मिल मजदूरों के हक की लड़ाई में साथ देने वाले सीटू के केके तिवारी और इंटक के रमेश कुमार सिंह ने बताया कि मिल प्रबंधन ने बिना किसी के कारण के मिल बंद करके मजदूरों के साथ धोखा दिया है, और इन लोगों का साथ शासन प्रशासन और सत्ता से जुडे़ लोगों ने खूब दिया। बताया कि ऐसे ग्रुप के हाथ मिल बेचने की बात कही जा रही है, जो अस्तित्व में ही नहीं हैं, इसकी पुष्टि प्रमुख सचिव श्रम विभाग भी कर चुके हैं।
अब जन जागरण आंदोलन
चीनी मिल आंदोलन के 1011वें दिन फुटहिया, संसारपुर, महरीपुर, रानीपुर, बेलाड़ी, कुसमौर एवं गायघाट सहित अन्य स्थानों पर इंटक के जिलाध्यक्ष रमेश कुमार सिंह की अध्यक्षता में जग जागरण अभियान चलाया गया। इस दौरान लोगों को बताया गया कि किस तरह फर्जी बैलेंस शीट बनकर और फर्जी कंपनी बनाकर मिल को बेच दिया गया, और सरकार इस मामले में मूक दर्शक बनी रही। बताया कि किस तरह 400 मृतक आश्रित अस्थायी श्रमिकों को जो 20 सालों से काम कर रहे थे, उन्हें ठेके का मजदूर बताकर बाहर कर दिया गया। इस मौके पर परमात्मा श्रीवास्तव, वंश बहादुर, रामकृपाल, राकेश, दीनानाथ, विनोद, भालचंद्र, निदेश सिंह, अकबर अली, राजकुमार, संतोष कुमार, राजबहादुर, पवन पांडेय, बृजेश पांडेय, श्रीराम, राम सुंदर, फूलचंद्र, अजीज मोहम्मद रसीद सहित अन्य मौजूद रहे।
मिल गेट पर जारी रहा धरना
बुधवार को बस्ती चीनी मिल बचाओ संघर्ष समिति की ओर से मिल गेट पर रंजीत कुमार की अध्यक्षता में धरना दिया गया। बुधवार को धरने का 1011 वां दिन रहा। इस मौके पर डॉ. राकेश कुमार, जयप्रकाश शुक्ल, रविंद्र यादव, सुरेंद्र मिश्र, कपिलदेव पांडेय, संजीव कुमार, त्रियुगी, भोलानाथ, सूर्यमणि चतुर्वेदी, पीतांबर शुक्ल एवं राजकुमार चतुर्वेदी सहित अन्य मौजूद रहे।
मिल प्रबंधन ने दी सफाई
बस्ती। ए यूनिट ऑफ फेनिल शुगर लिमिटेड ने उप श्रमायुक्त को श्रमिकों और श्रमिक नेताओं को इस बात के लिए राजी करने को कहा कि कर्मचारी अन्य यूनिट में अपना स्थानान्तरण करने में अपनी रजामंदी दे दें, ताकि उन्हें नियमित वेतन मिल सके। कहा है कि प्रबंधन ने मिल के पास कोई आय का स्रोत नहीं है। साथ ही यह भी कहा है कि बस्ती चीनी मिल निरंतर घाटे के कारण बंद करना पड़ा। चीनी मिल के पास आय को अन्य कोई स्रोत नहीं रह गया। बावजूद प्रबंधन ने अन्य स्रोत से श्रमिकों को अप्रैल 2013 से अभी तक कुल 12 करोड़ 90 हजार हजार रुपये का भुगतान श्रमिकों को कर चुका है।