स्वातंत्रता संग्राम सेनानी राम आश्रय शुक्ला का चित्र
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बस्ती जिले के गौर ब्लॉक के सिकटा में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राम आसरे शुक्ल से मिलने नेताजी सुभाष चंद्र बोस आते थे। यही नहीं सेनानी शुक्ल ने नेताजी को 40 युवाओं की एक भरोसेमंद व लड़ाकू टुकड़ी भी भेंट की थी।
हर्रैया तहसील के सिकटा गांव में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राम आसरे शुक्ल अंग्रेजों के खिलाफ देशभक्तों के लिए अगुवा का काम करते थे। वह युवाओं को प्रशिक्षित कर आजादी की लड़ाई को तेज व गतिशील रखते थे। स्वर्गीय शुक्ल कांग्रेस कौमी सेवादार के जिला कप्तान भी थे। एक समय ऐसा आया जब अंग्रेज सरकार ने उन्हें जेल में बंद किया तो वह जेल से ही आंदोलन चलाने को मजबूर हो गए।
ब्रिटानिया हुकूमत को जब पता चला तो उन्हें गोंडा जेल में डाल दिया। यहां जेलर का रवैया इनके प्रति सहानुभूतिपूर्ण रहा। इससे सेनानियों का उत्पीड़न कुछ कम हो गया। 14 महीने बाद जब वह रिहा हुए तो 1941-42 में टिनिच के पास बेलवाडाड़ी में गांधी चौकी स्थापित किया और अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन को तेज किया।
जुलाई 1902 में जन्म लेने वाले शुक्ल ने 111 वर्ष की जीवन यात्रा पूरी करने के बाद 20 दिसंबर 2013 को देह त्याग दिया। आजादी की लड़ाई में इन्हें जहां लोग कप्तान साहब कहते थे तो वहीं आजादी मिलने पर इन्होंने राजनीति से संन्यास ले लिया और योग व धर्म का प्रचार करने लगे। इसके कारण योगी बाबा के नाम से मशहूर हो गए।
सूनी पड़ी रहती है तपोस्थली
सेनानी शुक्ल की समाधि इनकी ही तपोस्थली सिकटा में बनी हुई है। यहां पहले जिला प्रशासन के निर्देश पर हर राष्ट्रीय पर्व पर तहसील व ब्लॉक स्तरीय अधिकारी आकर श्रद्धांजलि देते थे, वहीं, अब यहां हर समय सन्नाटा पसरा रहता है। इनके सुपुत्र नगर पालिका के कर्मचारी नेता सत्यदेव शुक्ल बताते हैं कि सूबे के प्रथम मुख्यमंत्री पंडित गोविंद वल्लभ पंत ने विशिष्ट पद के लिए आमंत्रित किया था लेकिन उन्होंने अस्वीकार कर दिया था। जबकि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी व मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा ने ताम्रपत्र देकर सम्मानित किया था।
शहर के आवास विकास के गेट पर है सेनानी का नाम
पूर्व विधायक दयाराम चौधरी ने शहर के आवास विकास कॉलोनी में नवनिर्मित गेट पर सेनानी राम आसरे शुक्ल का नाम लिखवाकर अमर कर दिया है जबकि अन्य किसी भी राजनैतिक हस्ती को उनका नाम भी याद नहीं है।