- पटाखा बेचने के लाइसेंसियों के पास नहीं है सुरक्षित गोदाम
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। जिले में पटाखा व्यवसाइयों ने घनी बस्ती में काफी मात्रा में माल स्टोर कर रखा है। प्रशासन के पास न तो उनके स्टॉक का सही आकलन है और न ही उनके गोदाम की जानकारी है। स्थाई लाइसेंसियों ने भी अपने गोदाम की पूरी जानकारी नहीं दी है। डर है कि कहीं मामूली चूक हुई तो बड़ा हादसा न हो जाए। इससे परेशान प्रशासन ने सत्यापन का अभियान शुरू किया है। जिससे पटाखा कारोबारियों में खलबली मच गई।
प्रशासन की सूची में जिले भर में सिर्फ 22 पटाखा व्यवसाय के स्थाई लाइसेंसी पंजीकृत हैं। इसके अलावा 250 अस्थाई लाइसेंस जारी किए गए हैं। जिसमें सदर तहसील में 95, रुधौली में 40, भानपुर में 60 और हर्रैया तहसील क्षेत्र के 55 अस्थाई लाइसेंसी शामिल हैं। इनमें स्थाई लाइसेंसियों को 45 किलो और अस्थाई लाइसेंसियों को 15 किलोग्राम पटाखे रखने की अनुमति है। मगर सभी ने मनमाने ढंग से अनुमति से ज्यादा स्टॉक जमा कर रखा है। जांच में पाया गया कि विस्फोटक अधिनियम की अनदेखी की जा रही है। अधिकतर दुकानों में अग्निरोधक उपायों की कमी पाई गई है। सीओ ने बताया कि दुकानों का निरीक्षण पूरी रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपी जाएगी। अधिकारियों के निर्देश पर दुकानदारों पर कार्रवाई की जाएगी।
यह हैं जिले के स्थाई लाइसेंसी
- परशुरामपुर थानाक्षेत्र में मोहम्मद मुस्तफा, कमरुज्जमा, मंगरु, सलमान, पुरानी बस्ती क्षेत्र से सुभाषचन्द्र गुप्ता, शुभम कसौधन, प्रदीप कुमार, दिलीप कसौधन, आनंद कुमार, निहाल अहमद, राजेश, पिंटू, मुंडेरवा से लक्ष्मी प्रसाद गुप्ता, नगर बाजार से दुर्गेश गुप्ता, गौर थानाक्षेत्र से प्रमोद कुमार, अमरनाथ कसौधन, सोनहा से भोला, अर्जुन, ओमप्रकाश जायसवाल, रुधौली से फरीदा खातून, कप्तानगंज से अजय, लालगंज से पवन शामिल हैं। इसमें पांच को 25 किलो और शेष को 15 किलोग्राम विस्फोटक रखने की अनुज्ञप्ति है।
शहर में तीन जगह लगी दुकानें
- अग्निशमन अधिकारी पशुपतिनाथ मिश्र ने बताया कि शहर पटाखों की बिक्री के लिए तीन स्थान तय किए गए हैं। जिसमें गांधीनगर के जीआईसी स्कूल परिसर, कटरा के आईटीआई कैंपस और श्रीकृष्ण पांडेय इंटर कालेज परिसर शामिल है। इन तीनों जगह अस्थाई लाइसेंसियों की दुकानें लगाई जा रही हैं। दुकानदारों को आगाह किया गया है कि वे विस्फोटक अधिनियम और लाइसेंसिग शर्तों का पूर्णतया पालन करें। अपनी दुकानें प्लास्टिक या कपड़े की न बनाएं। उसमें हेलोजन बल्ब या अन्य ज्वलनशील सामग्री न रखें। दुकानों पर फायर स्टिंग्यूशर या बालू-पानी की बाल्टी अवश्य रखें।