बस्ती। अपने जिले में तैराकी प्रतियोगिता के लिए कहीं कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में कोई तैराक प्रदेश व राष्ट्रीय स्तर पर तो दूर जिला स्तरीय प्रतियोगिता में भी भाग नहीं लेता है। नतीजतन अपने जिले से यह खेल करीब-करीब विदा हो चुका है। ऐसा नहीं कि तैराकी के लिए तरणताल पर शासन ने न सोचा हो, मगर अपने जिले में जमीन न उपलब्ध होने के कारण मामला खटाई में है।
यूं तो खेल की दृष्टि से अपना जिला बेहद पिछड़ा है। कबड्डी, क्रिकेट, बैडमिंटन, बास्केटबाल, खो-खो जैसे खेल यहां नहीं होते हैं। मंडल मुख्यालय हाेने के बावजूद स्टेडियम को न इन खेलों में कोई रुचि है और न इन खेलों के लिए संघ अथवा प्रशिक्षक की जरूरत कभी प्रशासनिक अमले ने की। हालांकि कागज में तो यहां सभी खेल के लिए प्रयास चल रहे हैं, मगर परिणाम शून्य है। खेल के प्रति शासन चाहे जितनी रुचि लेता हो, मगर यहां के हालत अच्छे नहीं हैं। तभी तो तीन साल से तरणताल के लिए जिले में जमीन तक प्रशासन नहीं तलाश पाया। नतीजतन यह खेल भी यहां कभी भी चल नहीं सका।
उल्लेखनीय है कि जिले में तरणताल के लिए तत्कालीन डीएम आशुतोष निरंजन ने पहल की थी। इस पहल का परिणाम रहा कि शासन ने तरणताल की मंजूरी देते हुए जमीन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। इसके बाद तीन साल से जिले में तरणताल के लिए जमीन की तलाश की जा रही है, मगर यह तलाश अभी पूरी नहीं हो सकी है। ऐसे में तरणताल का सपना अधूरा है।
तरणताल के लिए जमीन तलाश अभी चल रही है। कुछ स्थानों पर इसे देखा गया था ,मगर वह मानक के अनुसार नहीं था। ऐसे में उसे निरस्त करना पड़ा। प्रशासन के माध्यम से तरणताल के लिए जमीन खोजा जा रहा है।
-संजय शर्मा, क्षेत्रीय क्रीडाधिकारी